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खिलाड़ी न डेट, बस वेट ही वेट

भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा उत्तराखंड को अंधेरे में रखे जाने के कारण लगातार तीसरे साल भी सैफ विंटर गेम्स का आयोजन नहीं हो पाया। एसोसिएशन ने पहले अंतरराष्ट्रीय खेल कैलेंडर की जानकारी राज्य को नहीं दी। अंतिम समय में जब तिथि तय करने की बात आई तो उसने खेल कैलेंडर का हवाला देते हुए खिलाड़ी उपलब्ध ना होने की बात कह दी।

सैफ विंटर गेम्स के लिए तैयारी नहीं होने की वजह से बीते वर्षो में दो बार उत्तराखंड को शर्मिदगी उठानी पड़ी थी लेकिन खेल टलने का असल कारण इस बार सामने आया है। आईओए (भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन) ने राज्य सरकार को बताया है कि अन्य स्पर्धाएं होने की वजह से सैफ विंटर गेम्स के लिए कोई डेट नहीं दी जा सकती हैं।

एसोसिएशन ने कहा है कि, 29 जनवरी से 9 फरवरी तक ढाका में सैफ समर गेम्स होने हैं। 12 फरवरी से वैंकूवर में विंटर ओलंपिक गेम्स तय हैं। सभी खिलाड़ी इन आयोजनों की तैयारियों में लगे हैं। अन्य देशों के खिलाड़ी भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।

खेल विभाग अब अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बुलाकर विंटर गेम्स कराने पर विचार कर रहा है लेकिन आयोजन के लिए न तो स्तरीय खिलाड़ी मिल रहे हैं और न ही कोई डेट। खेलों की तैयारी में कुल 135 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। इसमें केन्द्र ने 110 करोड़ की मदद दी है। इस धनराशि से औली व देहरादून में निर्माण कार्य कराया गया है।

विंटर गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया ने भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन को 31 जनवरी से 5 फरवरी तक खेल कराने का प्रस्ताव दिया था। इस पर आइओए ने सैद्धांतिक सहमति जताई थी। लेकिन ऐन वक्त पर उसने डेट देने से इंकार कर दिया। खेल सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि, आईओए ने उस समय तिथियों की टकराहट के विषय में कोई जानकारी नहीं दी थी।

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