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6 जून, 2020|11:11|IST

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पाइल्स-2

कल आपने पाइल्स के कुछ लक्षणों के बारे में पढ़ा। ओपीडी में प्रोक्टोस्कोप यंत्र डाल टॉर्च के प्रकाश में जांच करने पर ही गुदा के अंदर की स्फीत शिराएं देखी जा सकती हैं। इतने भर से ही यह पता चल जाता है कि बवासीर किस अवस्था में है। बवासीर को नजरअंदाज करने से बड़ी समस्याएं जन्म ले लेती हैं। मलद्वार से बार-बार रक्तस्नव होने से शरीर में खून की कमी आ जाती है। कभी-कभार स्थिति गंभीर हो जाती है और इमरजेंसी सर्जरी करवाने की नौबत खड़ी हो सकती है।

सरल उपचार
शुरुआती बवासीर में कब्ज दूर होने से ही कई बार समस्या दूर हो जाती है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, सलाद, इसबगोल और पानी की मात्र बढ़ाना फलदायी होता है। दिन में 3-4 बार टब में गुनगुना पानी भरें और पोटाश के कुछ कण डाल उसमें 10-15 मिनट बैठने और सेक करने से भी लाभ पहुंचता है। मलद्वार पर सूजन और खुजली मिटाने वाली मरहमें प्रोक्टोसेडिल, फाक्टू और एनोवेट लगाने से भी राहत मिलती है।

यदि आराम न मिले और फूली हुई शिरा अभी गुदा के भीतर ही हो तो शिरा के अंदरूनी हिस्से में खास रासायनिक घोल का टीका लगा कर उसमें सिकुड़न लाई जा सकती है। जिन मामलों में टीका लगाने से स्फीत शिरा को काबू में करना मुश्किल होता है, उनमें फूली हुई शिरा के शुरुआती छोर पर इलास्टिक बैंड बांधकर भी शिरा में खून का दौरा रोका जा सकता है। 

लटकी हुई स्फीत शिरा को लेजर, इलैक्ट्रिक कोटरी या इन्फ्रारेड ऊष्मा से भी नष्ट किया जा सकता है, पर स्फीत शिराओं के लटकने पर उन्हें ऑपरेशन से काट कर निकालना ही बेहतर साबित होता है। यह बहुत जटिल नहीं होता, पर इसे किसी अनुभवी सर्जन से ही करवाना ठीक है। फिर यह ध्यान रखना पड़ता है कि बवासीर कहीं दोबारा न हो जाए।