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दुनियाभर में भारतीय सौंदर्य का परचम लहरायेंगी पूजा चोपड़ा

दुनियाभर में भारतीय सौंदर्य का परचम लहरायेंगी पूजा चोपड़ा

नब्बे के दशक में भारतीय सुंदरियों के अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना परचम लहराने के बाद आए अकाल को दूर करने की उम्मीदों के साथ पूरे देश और दुनिया की निगाहें 12 दिसंबर को जोहांसबर्ग में मिस इंडिया पूजा चोपड़ा पर होंगी।
   
मिस वर्ल्ड सौंदर्य प्रतियोगिता में पूजा चोपड़ा के पीछे भारतीय सुंदरियों की लम्बी विरासत है। साठ के दशक में रीता फारिया के सबसे पहले मिस वर्ल्ड के ताज पर कब्जा करने के बाद नब्बे के दशक में ऐश्वर्या राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999) और प्रियंका चोपड़ा (2000) ने खूबसूरती की दुनिया में भारतीय सौंदर्य का सिक्का जमाया। हालांकि इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में देश को सूखे के लम्बे दौर से गुजरना पड़ रहा है।
   
देशवासियों की इस जबर्दस्त उम्मीद का अहसास पूजा को भी है। पूजा अच्छी तरह जानती हैं कि उनपर लोगों को बड़ी आशाएं हैं और उनसे पहले इससे बड़े नाम जुड़े हुए हैं। पूजा ने भी तैयारियों में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की तैयारी के बारे में उन्होंने बताया की इन दिनों वह अपने खानपान पर काफी ध्यान दे रही हैं और कम कैलोरी वाला भोजन ले रही हैं।
   
जब उनसे पूछा गया कि अगर वह ब्यूटी क्वीन नहीं होतीं तो क्या होतीं, पूजा ने कहा कि अगर वो ब्यूटी क्वीन नहीं होतीं तो निश्चित तौर पर आईएएस अधिकारी होतीं क्यूंकि बचपन से ही वे किरण बेदी से विशेष तौर पर प्रभावित रही हैं।

मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की प्रक्रिया में अन्य देशों की प्रतियोगियों के बीच भारत की छवि के बारे में बात करते हुए पूजा की आंखों में विशेष चमक आ गई। उन्होंने कहा कि आप विश्वास नहीं करेंगे अन्य देशों की सुंदरियों में बालीवुड, यहां की फिल्में और नृत्य, भारतीय व्यंजन आदि के बारे में काफी उत्सुकता थी। पूजा ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुझसे कई सवाल करे और मैंने उन्हें सभी विषयों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की प्रक्रिया के दौरान हम जहां भी गए वहां लोगों ने विशेष तौर पर मिस इंडिया से मिलवाने का आग्रह किया। इसका कारण पूर्व भारतीय सुंदरियों की ओर से प्रतियोगिता में स्थापित उच्च मानदंड रहे। पूजा ने कहा कि यहां लोगों ने खास तौर पर ऐश्वर्या राय बच्चन की चर्चा की जिन्होंने 15 वर्ष पहले विश्व सुंदरी के ताज पर कब्जा किया था।

आम तौर पर यह धारणा है कि संपन्न घराने की संतानें ही सौंदर्य और माडलिंग की दुनिया में प्रवेश कर पाती हैं, लेकिन इसके विपरीत पूजा का बचपन काफी कठिनाइयों में बीता। जब पूजा काफी छोटी थी तब उनके पिता ने उन्हें छोड़ दिया और उनका पालन पोषण उनकी मां ने अकेले ही किया।
   
स्कूल और कालेज की शिक्षा के दौरान पूजा ने सभी क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। पुणे स्थित नेस वाडिया कालेज से स्नातक पूजा कालेज सुंदरी का ताज जीतने के बाद मिस पुणे रही और बाद में माडलिंग के क्षेत्र में कदम रखा। पैंटालून मिस इंडिया 2009 में पूजा चोपड़ा को अंतिम सूची में सीधे प्रवेश दिया गया। जिसमें मिली जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

पूजा की संघर्षमय जिंदगी और हालातों से लड़कर मिस इंडिया 2009 के ताज तक का सफर प्रेरणादायक तो है ही, मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जीत के लिए दुआ मांगते करोड़ों भारतीयों के हाथ भी उनकी सफलता की कहानी कहते हैं।

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