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कोयला किल्लत से गिरा विद्युतगृहों का उत्पादन

कोयला किल्लत का असर तापीय विद्युतगृहों के उत्पादन पर पड़ने लगा है। एनटीपीसी के कई विद्युतगृह कोयले की कमी की वजह से गुजरे नवम्बर माह में अपनी पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन करने में सफल नहीं हो सके।

विद्युतगृहों के कोयले की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर सहित कोयला आयात में कमी को भी इसकी वजह बताया जा रहा है। इसी चलते नवम्बर महीने में एनटीपीसी के बिजलीघरों में 981 मिलियन यूनिट कम हुआ उत्पादन हुआ।

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक एनटीपीसी के 2340 मेगावाट क्षमता वाले कहलगांव और 1600 मेगावाट क्षमता वाले फरक्का विद्युतगृह में कोयले की कमी से महज 53.05 एवं 64.28 प्रतिशत पीएलएफ (प्लांट लोड फैक्टर)पर ही उत्पादन किया जा सका।

नवम्बर माह में एनटीपीसी को कोयले की कमी के चलते 981 मिलियन यूनिट एनर्जी का नुकसान हुआ। चालू वित्तीय वर्ष के अक्टूबर तक देश के विभिन्न विद्युतगृहों को 7579 मिलियन यूनिट का नुकसान कोयले की कमी से झेलना पड़ा है।

निर्धारित लिंकेज से लगभग 97 प्रतिशत कोयले की आपूर्ति के अतिरिक्त कोयला आयात में आयी कमी भी विद्युतगृहों में कोयले की किल्लत की वजह रही है। गत 30 नवम्बर को देश के कुल 78 तापीय विद्युतगृहों में से 25 में कोयले का क्रिटिकल स्टाक (सात दिन से कम) था जिसमें 16 विद्युतगृहों में यह सुपर क्रिटिकल हालत में अर्थात चार दिन से कम कोयला मौजूद था।

सीईए सूत्रों के मुताबिक कोयले की किल्लत को देखते हुए बिजली उत्पादक प्रतिष्ठानों को फरवरी माह में ही 28.7 मिलियन टन कोयला आयात करने की सलाह दी जा चुकी थी, किन्तु कतिपय कारणों से आयात की प्रक्रिया पूरी न होने से मौजूदा संकट उत्पन्न हुआ है।

वर्तमान में तापीय विद्युतगृहों के पास निर्धारित 22 मिलियन टन कोयले की जगह महज 10.7 मिलियन टन कोयला है जो आगामी महीनों में भी बिजली उत्पादन के लिए खतरे की घंटी है।

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