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आकाश में छोटे-छोटे जासूस निगहबानी को तैयार

आसमान में छोटे-छोटे कीट पतंगों जैसी दिखने वाली चीजों को अगर आप मामूली कीट पतंग ही समझते हैं, तो शायद अब आपको अपने ज्ञान में थोड़ा फेरबदल करना होगा। क्योंकि भारत में अब बड़े बड़े जासूसों के मुश्किल काम को अंजाम देने के लिए छोटे जासूस बनकर तैयार हो चुके हैं।

देश के एरोस्पेस वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा उपकरण तैयार करने में सफलता पाई है, जो मात्र 300 ग्राम वजन का है और इसकी लंबाई मात्र 300 मिलीमीटर है। यह विशेष तौर पर निगरानी और आपदा प्रबंधन के काम के लिए तैयार किए गए हैं।

यह जासूस 30 से 40 मिनट तक की उड़ान के दौरान अलग-अलग इलाकों की फोटो खींच सकते हैं और इनका कार्यक्षेत्र दो से पांच किलोमीटर के दायरे में है। यह 100 से 200 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़कर अपने काम को अंजाम दे सकते हैं।

इस उपकरण के निर्माण में लगे लेफ्टि. जनरल डॉ. वीजे सुंदरम ने बताया कि इस उपकरण की जो सबसे विशेष बात है वह यह कि इसको रडार भी पकड़ नहीं सकता है, क्योंकि इनके निर्माण में धातु और कार्बन फाइबर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थिति में यह उपकरण ले जाने में आसान है और जरूरत पड़ने पर इन्हें निगरानी के लिए आस-पास या कुछ किमी आगे के क्षेत्रों में भेजा जा सकता है। ये उपकरण वहां निगरानी करने के साथ-साथ फोटो खींचकर वापस आ सकते हैं।

रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व निदेशक रहे सुंदरम ने कहा कि इस उपकरण के निर्माण में सात से आठ लाख रुपए का खर्च आया है, जिसका 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ सेंसर लगाने में लगा है।

उन्होंने कहा कि यह जासूस एक आम विमान के जैसे हैं। इनको जमीन पर बैठकर नियंत्रित और मार्गदर्शित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह जमीन पर चलने के अलावा हवा में उड़ सकता है।

सुंदरम ने कहा कि हम कई जगहों पर थोड़ा-थोड़ा काम कर रहे हैं। अब हम चाहते हैं कि यह एक एकीकृत कार्यक्रम के अंतर्गत आए। अब हम इसे कठिन परिस्थितियों में भी उड़ने के काबिल बनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अब इस उपकरण को बिना विशेषज्ञों के आसानी से तैनात किए जा सकने के योग्य बनाने के प्रयास में जुटे हैं।

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  • Web Title:आकाश में छोटे-छोटे जासूस निगहबानी को तैयार