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छलांगें मारने में मजा आता है जिसे

छलांगें मारने में मजा आता है जिसे

आज हम तुम्हें एक अनोखे जानवर के बारे में बताते हैं। यह जानवर अन्य जानवरों से कई मायनों में भिन्न होता है। यह इंसान की तरह दो पैरों पर खड़ा हो सकता है। इसका सिर बिना सींग के हिरन जैसा होता है और यह मेंढक की तरह कूद-कूद कर आगे बढ़ता है। नहीं समझ पाये ना, हम किस जानवर की बात कर रहे हैं! दरअसल यह जानवर हमारे देश में नहीं पाया जाता, इसलिए तुम्हें एकदम याद नहीं आया। अरे भाई हम कंगारू की बात कर रहे हैं। अब तुम्हें याद आ गया होगा, क्योंकि तुमने इसे किताबों, चिड़ियाघर में और टीवी पर अवश्य देखा होगा। जानते हो कंगारू पूरे विश्व में केवल आस्ट्रेलिया महाद्वीप पर पाया जाता है। यही कारण है कि आस्ट्रेलिया की धरती का यह प्राणी वहां की संस्कृति का हिस्सा है।

यह एक स्तनपायी जीव है, जिसकी चार प्रजातियां होती है। इनमें सबसे बड़ा ‘रैड कंगारू’ होता है। इसकी लम्बाई दो मीटर तक और वजन 90 कि.ग्रा़ तक हो सकता है। आस्ट्रेलिया के पूर्वी भागों में पाये जाने वाली प्रजाति ‘ईस्टर्न ग्रे कंगारू’ कहलाती है। यह वहां के उपजाऊ मैदानों में होते हैं। ‘वैस्टर्न ग्रे कंगारू’ पश्चिमी आस्ट्रेलिया में तटीय भागों के पास और वहां की ‘डार्लिंग नदी’ के निकटवर्ती क्षेत्रों में होते हैं। यह छोटे आकार के होते हैं। एंटीलोपाइन कंगारू महाद्वीप के उत्तरी हिस्से के हरे-भरे भागों में रहते हैं।

शायद तुम्हें पता न हो, संसार में कंगारू ही ऐसा एकमात्र जीव है, जो आवागमन के लिए चलता नहीं है, केवल छलांग लगाता है। है ना चौंकाने वाली बात। दरअसल इसके आगे के पैर छोटे होते हैं और पीछे के पैर काफी लम्बे होते हैं। इनसे इसके भारी शरीर के चलने का संतुलन नहीं बनता। अधिकतर कंगारू अपने पिछले दोनो पैर अलग-अलग आगे नहीं बढ़ा सकते, इसलिए इन्हें कूद कर ही बढ़ना होता है। मजाे की बात यह है कि इसे कूद-कूद कर चलने में कोई परेशानी नहीं होती, क्योंकि इसके कूदने का क्रम इसके सांस लेने की प्रक्रिया से मेल खाता है। कंगारू अपने पिछले दो पैरों पर आसानी से खड़ा हो जाता है, लेकिन इन पर चलने के लिए इसे अपनी मजबूत पूंछ का सहारा अवश्य लेना होता है।

इस तरह यह धीरे-धीरे थोड़ा सा चल पाता है। बड़े होने के कारण इसके पिछले पैर कूदने में सहायक होते हैं। ‘रैड कंगारू’ की कूदते हुए दौड़ने की सामान्य गति 25 कि़मी़ प्रति घंटा तक होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह कुछ दूर तक 60-70 कि़ मी़ की रफ्तार से भी दौड़ पड़ता है। अन्य प्रजातियों के कंगारू कम गति से दौड़ पाते हैं।
 इस प्राणी के विषय में एक और अनोखी बात है। पता है, मादा कंगारू के पेट पर एक थैली होती है। अपने नन्हे बच्चों को यह उस थैली में सुरक्षित रखती है। बच्चों जब थोड़े बड़े होते हैं तो यह उन्हें थोड़ी -थोड़ी देर के लिए बाहर निकालती है, ताकि वह कूदने के अभ्यस्त हो सकें। जब वह थकने लगते हैं तो कूद कर पुन: अपनी मां की थैली में आ जाते हैं। उसी थैली में यह स्तनपान करते हैं। देखा कितनी अद्भुत बात है कि कंगारू के बच्चों उस थैली में मां की गोद की तरह रहते हैं। जब छलांग लगाना सीख जाते हैं, तब यह थैली में बैठना छोड़ते हैं।

शरीर की तुलना में कंगारू का सिर काफी छोटा होता है। वैसे इनकी देखने और सुनने की शक्ति अच्छी होती है। यह अपना कान हर दिशा में घुमा लेते हैं। यह प्राय: समूह में रहना पसंद करते हैं। इनका समूह 8-10 से सौ कंगारू का हो सकता है। कंगारू एक शाकाहारी जानवर है। अलग-अलग प्रजाति के कंगारुओं का भोजन भी कुछ अलग होता है। ईस्टर्न ग्रे कंगारू तरह-तरह की घास और पत्तियां खाते हैं, जबकि रैड कंगारू प्राय जड़ी- बूटियों को खाते हैं। अपने भोजन की तलाश में इन्हें कई बार दूर-दूर तक जाना पड़ता है। छोटे कंगारू प्राय रात में भोजन की तलाश में निकलते हैं। इन्हें पानी की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है। तुम सोच भी नहीं सकते कि यह कई महीने तक बिना पानी पीये रह सकते हैं।

आस्ट्रेलिया वासियों के लिए कंगारू आम जीवन का हिस्सा हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्राणी आस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय चिन्ह है तथा वहां का राष्ट्रीय पशु है। वहां के सिक्कों और नोटों पर कंगारू का चित्र होता है। विभिन्न खेलों की टीमों के नाम कंगारू के नामों पर रखे जाते हैं। वहां बच्चों के खिलौनों में कंगारू मुख्य रूप से होता है। आस्ट्रेलिया की फिल्म, कार्टून, टीवी कार्यक्रम आदि में भी कंगारू किसी न किसी रूप में देखने को मिल जाते हैं। पर्यटकों के लिए वहां के हैंडीक्राफ्ट और सोविनियर में कंगारू की छवि होती है।

विशाल महाद्वीप के रूप में फैले आस्ट्रेलिया में बड़े-बड़े हाइवे हैं। उन पर बहुत-सी जगह ‘कंगारू क्रॉसिंग’ के बोर्ड देखने को मिलते हैं। यह बोर्ड ऐसे स्थानों पर लगे होते हैं, जिनके आसपास कंगारू पाये जाते हैं। वहां यह सड़कों पर भी आ जाते हैं। ऐसे बोर्ड ड्राइवरों के लिए सतर्क रहने के संकेत होते हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो। महाद्वीप पर कंगारू काफी बड़ी तादाद में पाये जाते हैं। इन्हें जंगली कुत्ते और अन्य कुछ जंगली जीवों से खतरा होता है। मनुष्य भी इनका शिकार करते हैं।

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