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डेनमार्क के मसौदे से सम्मेलन पर मंडराया संकट

डेनमार्क के मसौदे से सम्मेलन पर मंडराया संकट

जलवायु परिवर्तन पर हो रहे शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन डेनमार्क मसौदे की वजह से विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद गहरा गया। इससे यह सम्मेलन संकट में पड़ता दिख रहा है।

डेनमार्क के मसौदे में वे सभी बातें शामिल की गई हैं जिन पर दो वर्षों से बात चल रही थी। लगभग सभी विकासशील देश इस मसौदे खिलाफ एकजुट हो गए हैं। इस मसौदे की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र में सूडान के राजदूत लुमुंबा स्टैनिसलॉ डी-एपिंग ने कहा, ''डेनमार्क का मसौदा यूएनएफसीसीसी और क्योटो प्रोटोकॉल दोनों को खत्म करने वाला है। यह विकासशी देशों पर नई बाध्यता थोपता है। ''  सूडान भी उन 77 देशों के साथ चला गया है जिसमें लगभग सभी विकासशील देश शामिल हैं।

भारत ने भी डेनमार्क के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। इसमें विकासशील देशों के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की कटौती की समयसीमा का उल्लेख है। भारत की ओर से कहा है कि अगर इस ओर जोर दिया गया तो वह और अन्य विकासशील देश इस सम्मेलन से बाहर हो जाएंगे।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के एक अधिकारी ने कहा कि इस मसौदे की प्रतिलिपि भारत सहित कुछ देशों को दी गई जो एक बड़ा असामान्य कदम है। भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका इस मसौदे के समांतर एक अलग तरह का मसौदा भी रखा है। ये सभी डेनिश मसौदे का खुलकर विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि इससे उनके विकास में अत्यधिक बाधा पैदा होगी।

उधर, डेनमार्क के पर्यावरण मंत्री काने हेडेगार्ड ने कहा था कि यह मसौदा नहीं है बल्कि चर्चा से जुड़ा पत्र था जो वापस ले लिया गया।

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