class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आयुर्वेद के प्रचार पर खर्च होंगे 42 लाख

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को एलोपैथी के भंवर से निकालने के लिए आयुष विभाग ने एक विशेष योजना तैयार की है। इस योजना के तहत हरियाणा में मेडिकल व पैरा मेडिकल से संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यही लोग आम जनता के बीच जाकर आयुर्वेद का प्रचार प्रसार करेंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत इस पर प्रदेश में करीब 42 लाख रुपए खर्च किए जाने हैं।

इस बारे में आयुर्वेद विभाग के उच्च अधिकारियों व डाक्टरों की एक बैठक विगत सप्ताह पंचकूला में आयोजित की गई। जनवरी माह में इस पर दिल्ली में अंतिम बैठक आयोजित की जाएगी। आयुर्वेदिक दवाओं का संतोषजनक परिणाम न मिलने के कारण प्रदेश के मरीजों का इस चिकित्सा पद्धति के प्रति बहुत कम विश्वास है। अंग्रेजी दवाओं के तुरंत प्रभाव वाले रिजल्ट की वजह से भी आयुर्वेद के प्रति लोगों का मोह कम हुआ है।

प्रदेश के विभाग में इसकी एक वजह भरोसेमंद दवा कंपनियों से दवा न खरीदना भी रहा है। आयुष अब इस व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन करने जा रहा है। दवाओं की खरीद का पूरा जिम्मा जिला मुख्यालयों को दिया गया है। वह भी जरूरत के हिसाब से। सभी जिला मुख्यालयों से डिमांड एकत्र कर ली गई हैं। मगर इनसे जरूरी आयुर्वेद के  खोए विश्वास को बहाल करने की कवायद है जो विभाग ने शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक विभाग में कार्यरत सभी आयुर्वेद चिकित्सकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। यही डाक्टर ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग की नर्सो, आशा वर्करों व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आयुर्वेद के बारे में बारीकी से जानकारी देंगे। आहार व दवाओं के बारे में बताते हुए संपूर्ण निरोगी रहने की कला सिखाई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में औसतन छह प्रशिक्षण कैंप लगाए जाएंगे। इन सभी कैंपों पर होने वाला खर्च एनआरएचएम के तहत होगा। जो लगभग 42 लाख रुपए बनता है।

आयुष के महानिदेशक आरके सपरा ने बताया कि एनआरएचएम के तहत आयुष को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। हर ब्लाक में आयुर्वेद के डाक्टर तैनात किए गए हैं। सीएचसी पर पंचकर्म स्थापित किए जाने हैं। पंचकुला व गुड़गांव में स्थापित कर दिए गए हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आयुर्वेद के प्रचार पर खर्च होंगे 42 लाख