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कर्मचारी टांगेंगे आईडेंटिटी कार्ड,दलालों की नहीं गलेगी दाल लगाम

अब लाइसेंस बनाने वालों को आरटीओ आना अनिवार्य होगा। दलालों के चंगुल से दफ्तर को छुड़ाने के लिए यह नई प्लानिंग की गई है। इसके साथ ही कर्मचारियों को आईडेंटिटी कार्ड लगाना पड़ेगा।


दलाली का गढ़ बन चुका आरटीओ दफ्तर में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। जहां पर अब आवेदकों की फोटो खींची जाएगी। जिसका रिकार्ड बनाया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने से दलालों द्वारा की जाने वाले घालमेल नहीं हो पाएगी। इसके साथ ही दूसरा शॉट कर्मचारियों को आईडेंटिटी कार्ड देकर लगाया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद दलाल आरटीओ में कार्य करा कर लोगों से पैसा नहीं ऐंठ पाएंगे। लाईसेंस बनावाने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। जिसका प्रमाण पत्र और एक एड्रेसप्रूफ और चार फोटो देनी होती है। जिसमें से तीन फोटो आरटीओ के रिकार्ड में लग जाती हैं,और एक लाइसेंस पर लगा कर आवेदक को लाइसेंस दे दिया जाता है। लर्निग लाइसेंस बनाने का सरकारी खर्च मात्र साठ रुपए है। जबकि दलाल आवेदकों को परेशानी से बचाने के नाम पर अधिक पैसा ऐंठ लेते हैं। यह अब नहीं हो पाएगा। आवेदकों को खुद दफ्तर तक आना पड़ेगा। जहां पर उसकी वेब कैमरे से फोटो खींच कर रिकार्ड में रख ली जाएगी। एआरटीओ(प्र) जय शंकर तिवारी ने बताया कि इससे रिकार्ड कंप्यूटर में आ जाएगा,और पारदर्शिता भी आएगी। तिवारी ने बताया कि इसके साथ ही कर्मचारियों के आईडेंटिटी कार्ड भी बनाए जाएंगे। इससे बाहरी व्यक्ति दफ्तर के अंदर नहीं आ पाएगा।

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