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बोर्ड बैठक में मंजूर, प्रोजेक्ट का श्रीगणेश बहुत दूर

वर्ष बीतने को है,लेकिन अथॉरिटी द्वारा वर्ष में तैयार में बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय में 90 फीसदी पर कागजी कार्य भी शुरु नहीं हुआ है। बोर्ड बैठक में आधा दजर्न अधिकारियों के समक्ष रखे जाने वाले मुद्दे धरातल पर आने के बाद धराशाई हो जाते हैं। छह माह, एक साल या इससे कुछ अधिक समय सीमा में प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य तो तय कर दिया जाता है, मगर अंजाम तक कुछेक मुद्दे ही पहुंच पाते हैं। बाकी के मुद्दे फाइलों में ही दम तोड़ रहे हैं।


बोर्ड बैठक में लिए जाने वाले मुद्दों को क्या हश्र होता है, इसका अंदाजा पिछली पांच बोर्ड बैठक में लिए गये निर्णय और उनमें अब तक की प्रगति रिपोर्ट से लग जाता है। किसानों की जमीन अधिग्रहण के बदले दी जाने वाली पांच प्रतिशत आबादी के मुद्दे को विगत वर्ष 18 सितंबर में पास किया गया, मगर अब तक सभी किसानों को पांच प्रतिशत आवासीय जमीन नहीं मिली। नई दरों पर मुआवजा देने के मुद्दे को 155वीं बोर्ड बैठक में पारित किया गया। तीन नवंबर को हुई इस बैठक में दो  माह के भीतर मुद्दे को सुलझाने का दावा अब तक अधूरा है।


कई संशोधनों के बाद लागू 157वीं बोर्ड बैठक में फाइनल हुई स्पोर्ट्स सिटी योजना धराशाई हो चुकी है। कॉमनवेल्थ गेम को ध्यान में रखकर गेस्ट हाउसों को मंजूरी व एससी-एसटी छात्रओं के लिए हॉस्टल योजना भी अब तक फाइलों में ही सिमटी हुई। अनसुलङो मुद्दों को संख्या दजर्नों हैं। बोर्ड से मंजूरी के बाद भी श्रीगणेश तक न हो पाने वाले प्रोजक्ट की फेहरिस्त बहुत लंबी है। इनमें से ज्यादातर सीधे जनता से जुड़े मुद्दे हैं। हालांकि अथॉरिटी के अफसर दावा करते हैं कि बोर्ड से मंजूर होने वाले ज्यादातर मुद्दे पूरे होते हैं। कुछेक मुद्दे ही बचते हैं, जिनके सामाधान में वक्त लग जाता है।

बैठक  मुद्दे   अब तक की प्रोग्रेस
154  पांच प्रतिशत आबादी   अब भी असमंजस 
155  नई दरों पर मुआवजा   अब तक लटका
156  सेक्टर-18 में मल्टीस्टोरी पार्किग  सिर्फ कागजों में
157  स्पोर्ट्स सिटी में संशोधन   योजना फ्लाप
158  गेस्ट हाउस व छात्रवास को मंजूरी योजना अब तक अधूर

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