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- स्टेडियम के पीछे थी सैकड़ों मीटर जमीन

खेलों के लिए जमीन ही नहीं होगी, तो खिलाड़ी खेलेंगे कहां? खरबों की विकास योजनाएं बनाते-बनाते जीडीए ने खेल विभाग की अरबों की जमीन का ही खेल कर डाला। जमीन पर कब्जा किया और उसे बेच भी दिया। स्पोर्ट्स अफसर जमीन मांग रहे हैं और जीडीए टाल-मटोल कर रहा है। परेशान होकर खेल अधिकारियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है।


दरअसल, खेल विभाग की यह बेशकीमती जमीन ( करीब 13 सौ वर्ग मीटर) महामाया स्पोर्ट्स स्टेडियम और नए रोडवेज बस स्टैंड के पीछे थी। खेल अधिकारियों के मुताबिक, खाली पड़ी जमीन पर विभाग हॉस्टल और अन्य निर्माण कराना चाहता था, मगर जीडीए ने उस जमीन को ही दबा लिया। अरबों की कीमत की जमीन पर कमर्शियल निर्माण करा दिए। स्पोर्ट्स अफसर विरोध करते ही रह गए, मगर उनकी एक न चली। तब से स्पोर्ट्स विभाग जमीन वापस मांग रहा है, मगर सुनवाई नहीं हो रही। प्रशासनिक हस्तक्षेप पर जीडीए अफसरों ने नगर निगम से खेल विभाग को जमीन देने के लिए लिखा था, मगर नगरायुक्त ने भी इस पर असहमति जता दी है।
हारकर जिला क्रीड़ाधिकारी मुद्रिका तिवारी ने जीडीए सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि यदि खेल विभाग की जमीन वापस मिलना संभव न हो तो जीडीए उसके बदले दूसरी जमीन की व्यवस्था कर दे। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए जमीन दिलाने को कहा है। एडीएम सिटी एसके श्रीवास्तव का कहना है कि इस सम्बंध में प्रशासन जीडीए को कार्रवाई के लिए लिख रहा है।

जमीन या पैसा, कुछ तो दो
खेल विभाग की उस जमीन की कीमत इस वक्त अरबों में है। जीडीए या तो हमें जमीन दे या हमारे विभाग को जमीन के बदले उसकी पूरी कीमत, कुछ न सही, दूसरी जमीन की व्यवस्था ही करा दे, ताकि खेल और खिलाड़ियों का कुछ भला हो सके।
     मुद्रिका तिवारी, जिला क्रीड़ाधिकारी

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