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क्या बला है स्वाइन फ्लू, नहीं जानते

पिथौरागढ़ को छोड़ कर राज्य के किसी पहाड़ी जिलों में स्वाइन फ्लू ने अब तक दस्तक नहीं दी है लेकिन जिस तरह देहरादून में स्वाइन फ्लू का वायरस खतरनाक होकर लौटा है, स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं। उनका कहना है कि, प्रत्येक जिले में स्वाइन फ्लू से निपटने के पर्याप्त इंतजाम किए गए है पर चिंता की बात यह है कि, दूर-दराज के लोगों को इस रोग के बारे में जानकारी ही नहीं है।

‘हिन्दुस्तान’ द्वारा की गई पड़ताल में यह सामने आया है कि, ज्यादातर पर्वतीय जिलों के लोगों को स्वाइन फ्लू और इससे बचाव के उपायों के बारे में नहीं जानते। जागरूकता अभियान केवल सड़कों तक सीमित हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि, रोग के प्रति जानकारी न होना घातक साबित हो सकता है।

कुमाऊं में हाईअलर्ट

कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुरेश चन्द्र टम्टा ने बताया कि स्वाइन फ्लू बीमारी के मद्देनजर कुमाऊं भर में चिकित्सा विभाग के स्टाफ को हाई अलर्ट कर दिया गया है। उधर, नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल के फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल दिल्ली के एनआईसीडी से स्वाइन फ्लू का विशेष प्रशिक्षण लेकर आए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के उड़े होशः

जनपद के चार मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो जाने के बाद उन्हें जिला संक्रामक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। सीएमओ ने बताया कि, जिले में के अस्पतालों में एलर्ट जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि, जिला अस्पताल पहुंचे सर्दी और बुखार के एक दजर्न मरीजों के सेंपल लिए       गए हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू, नहीं जानतेः

जिले में स्वाइन फ्लू से संबधित जानकारी का अभाव बना हुआ है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए स्कूलों एवं अन्य संस्थाओं के लिए जारी किये गये निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में गठित स्वाइन फ्लू नियंत्रण समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपक गौतम का कहना है कि जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू का कोई रोगी नहीं मिला है।   

 अब तक नहीं मिला कोई रोगीः

जिला अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। छात्र-छात्रओं को स्वाइन फ्लू से बचाने के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. जीएस जोशी का कहना है कि, जिले में स्वाइन फ्लू की दवाएं पर्याप्त मात्र में हैं। डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई है। डा. जोशी ने कहा कि स्वाइन फ्लू के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

सीएमओ बोले, विभाग मुस्तैदः

सीएमओ ने बताया कि जिले में स्वाइन फ्लू के उपचार के लिए बेस अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। टैमी फ्लू की पर्याप्त मात्र में व्यवस्था की गई है। रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

कंट्रोल रूम कर रहा कामः

जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में चार बैड लगाए गए हैं। एक नोडल अधिकारी बनाया गया है। सेंपल लेने के लिए एक पैथोलॉजिस्ट तैनात किया गया है। डीएसओ ठाकुर ने बताया कि, सभी अस्पतालों को आगाह किया गया है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले रोगी कंट्रोल रूम में भेजे जाएं।

डॉक्टरों को दिए विशेष निर्देश

सीएमओ डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि डाक्टरों को निर्देशित किया गया है कि, वे सर्दी, जुकाम के सामान्य मरीजों का गहन परीक्षण करें। संदेह होने पर सेंपल लिए जाने को कहा गया है। जिला अस्पताल में एक चिकित्सक समेत चार लोगों की प्रशिक्षित टीम बनाई गयी है।

स्कूलों को जारी किए निर्देशः

सीएमओ डॉ. डीएस रावत का कहना है कि, स्वाइन फ्लू से निपटने के दवाएं पर्याप्त मात्र में हैं। ओपीडी निरंतर चल रही है। संदिग्ध मरीजों को देखने के लिए अलग से डॉक्टर नियुक्त किया गया है। सभी ब्लाकों में तथा स्कूलों में स्वाइन फ्लू से बचने के लिए जरूरी ऐहतिहात के बारे में जानकारी दी गई है। 

केन्द्र से मांगी दवाएं

स्वास्थ्य महानिदेशक डा. सीपी आर्य ने कहा है कि, स्वाइन फ्लू का संक्रमण रोकने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में स्वाइन फ्लू की दवा और सिरप भिजवा दिए हैं। इसके अलावा जिला चिकित्सालयों मेंआइशोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।  स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में ओपीडी चल रही है। केन्द्र सरकार से दवा और किट की मांग की गई है।

जिला अस्पताल भी तैयार है

जिला अस्पताल की स्वाइन फ्लू यूनिट में अब तक जुकाम-बुखार से ग्रसित 23 मरीजों को स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाया गया है। स्वास्थ्य महकमे ने जिला अस्पताल में छह बैड संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित किए हुए हैं। साथ ही सिविल अस्पताल रुड़की में भी पांच बेड आरक्षित किए हुए हैं। आलम यह है कि पिछले एक हफ्ते में चार में से दो मरीजों को स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाया गया है।

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