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आरएसआई

रेपीटीटिव स्ट्रेन इंजरी (आरएसआई) को रेपीटीटिव मोशन इंजरी, रेपीटीटिव मोशन डिसॉर्डर, क्यूमुलेटिव ट्रॉमा डिसॉर्डर भी कहते हैं। यह इंजरी मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम में दिक्कत की वजह से होती है। आरएसआई होने की मुख्य वजह बार-बार काम को दोहराने, ज्यादा परिश्रम करने, कंपन, मैकेनिकल कंप्रेशन और बैठने की खराब मुद्रा के कारण होता है।

आरएसआई में रोगी में तीन तरह के लक्षण देखने में आते हैं। बाहों में दर्द, सहनशक्ति में कमी, कमजोरी जैसी समस्याएं इस तरह की इंजरी में आम होती हैं। आरएसआई में शारीरिक के साथ-साथ मानसिक समस्या भी होती है। 2008 में हुए एक अध्ययन में सामने आया कि ब्रिटेन के 68 प्रतिशत कर्मचारी आरएसआई की समस्या से पीड़ित हैं जिसमें सबसे आम समस्या पीठ, कंधे, हाथ और कलाई की थी।

आरएसआई होने का मुख्य कारण खराब तकनीक, कंप्यूटर का सीमा से ज्यादा प्रयोग, जोड़ों का कमजोर होना, रोजाना कसरत न करना, ज्यादा वजन, दबाव में काम करना, अंगुलियों के नाखून लंबे होने, देर रात तक सोने, तनाव और खराब जीवनशैली होती है। इसके प्राथमिक लक्षण के तौर पर अंगुलियों, हथेली, कोहनी और कंधों में जलन और दर्द होता है। लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने से दर्द बढ़ सकता है। साथ ही इसकी वजह से सुन्नपन, झनझनाहट, कड़ापन और सूजन आ जाती है और कभी-कभी नसों के नष्ट होने की बात देखने में आती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि आरएसआई के इलाज में देर नहीं करनी चाहिए।

इलाज इर्गोनॉमिक्स : इसमें हाथों और मुद्रा बदलकर शरीर का इलाज किया जाता है।
एडॉप्टिव टेक्नोलॉजी : एडॉप्टिव टेक्नोलॉजी में कीबोर्ड, माउस को बदल दिया जाता है।

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