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दांव पर नौनिहालों की सुरक्षा

चाक-डस्टर के लिए मोहताज माध्यमिक विद्यालय अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए पाई-पाई जुगाड़ रहे हैं। मामला नौनिहालों की जान बचाने का है। विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगाने का निर्देश स्कूल प्रबंधन पर भारी पड़ रहा है।

विद्यालयों का वेतन रोकने की धमकी दी गई है। अग्निशमन विभाग के दावों को मानें तो 98 फीसद स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं लग पाए हैं। शहर के कुछ निजी स्कूलों ने जरूर अग्निशमन यंत्र लगवाए हैं लेकिन यह उंट के मुंह में जीरा के समान है।  यह सब कुछ हुआ है एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उपरांत। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी शिक्षण संस्थाओं में अग्निशमन यंत्र लगाने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमली जामा पहनाने के लिए शासन सक्रिय है। विद्यालयों के प्रधानाचार्यो की नींद उड़ गई है। अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह अग्निशमन यंत्र लगा सके। इनका दावा है कि मानक के हिसाब से जो उपकरण लगाए जाने हैं, उनकी लागत 85000 रुपये के करीब है।

यह पैसा हम लाएं कहां से? मजेदार यह कि जिन माध्यमिक विद्यालयों को फायर ब्रिगेड विभाग ने नोटिस दी है, उसमें से अधिकांश ने धन न होने की बात कही है। उसकी सूचना डीआईओएस को देते हुए उसकी कापी अग्निशमन विभाग को भेजी गई है। डीआईओएस ने ऐसे स्कूलों को रेडक्रास के मद में लिए गए शुल्क की धनराशि का उपयोग करने का निर्देश दिया है।

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