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श्रमिक कांप उठते हैं शुक्रवार का मंजर याद करके


लुधियाना में तनाव के बादल तो छंट रहे हैं, लेकिन प्रवासियों के मनों में घर कर चुका भय कायम है। बेशक उद्योगपति उन्हें सुरक्षा का भरोसा दे रहे हैं, लेकिन गत शुक्रवार की घटना को याद करके वह कांप उठते हैं। ढंडारी में रहने वाले अधिकतर श्रमिक बार-बार एक ही बात करते हैं कि अब यहां रहकर क्या करेंगे, महीने की पगार मिलते ही यहां से चले जाएंगे। वहीं, कई प्रवासी श्रमिक ऐसे भी हैं जो कि अपने फैक्ट्री मालिकों की बात मानते हुए, घर लौटने का विचार त्यागकर मंगलवार को काम पर लौट आए।

वैसे आज शहर का माहौल सामान्य ही रहा। सुबह 8.00 से शाम 5.00 बजे तक कफ्र्यू में ढील दी गई थी, जिसे हालात सही रहने के चलते रात 10.00 बजे तक बढ़ा दिया गया। बाजार खुले रहे, फैक्ट्रियों में कामकाज शुरू हो गया तथा सड़कों पर खूब भीड़ रही।

‘हिन्दुस्तान’ ने मंगलवार को शहर के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों व कुछ औद्योगिक इकाइयों का दौरा करने पर पाया कि प्रवासी श्रमिक उक्त घटना के डर से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। शहर के ढंडारी क्षेत्र जहां मुख्य रूप से श्रमिकों का प्रदर्शन व उसके बाद पुलिस कार्रवाई हुई, में रहने वाले श्रमिक गुस्से से भरे पड़े हैं।

यहां रहने वाले सुशील कुमार (औरंगाबाद), मुनीष (औरंगाबाद), विकास (सासाराम), कृष्णा गुप्ता व सुभाष जयसवाल (बलिया), आशीष (रोहतास) आदि ने कहा कि अब उनका मन काम पर जाने को नहीं, बल्कि अपने गांव जाने को कर रहा है। उन पर इतना जुल्म हुआ है कि अब यहां रहें तो कैसे रहें। अभी तक यहां बैठे हैं तो मजबूरी में, क्योंकि फैक्ट्री से पेमेंट नहीं मिली है। पेमेंट मिलते ही यहां से चले जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वह उस पुलिस पर सुरक्षा के लिए कैसे विश्वास करें, जो कि उन्हें पिटते हुए देखती रही।
वहीं, विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में चार दिन बाद काम पर लौटे देवरिया के जसवंत प्रसाद, गोंडा के रामतीर्थ तथा फतेहपुर के लोकनाथ ने कहा कि उनके मनों में डर तो था, लेकिन मालिकों के विश्वास दिलाने से भय कम हो गया है।

वह यहां 15-20 साल से काम कर रहे हैं तथा भविष्य में भी काम जारी रखना चाहते हैं। जीएस ऑटो इंटरनेशनल के एमडी सुरिंदर सिंह रयात ने कहा कि निश्चित रूप से पिछले दिनों की घटनाओं से श्रमिकों के मनोंे में डर है तथा कामकाज भी प्रभावित हुआ है, लेकिन वह निजी तौर पर उनसे मिल कर उनकी तकलीफें सुन रहे हैं। इससे श्रमिकों के मनों आत्म विश्वास बहाल हो रहा है। उनके यहां करीब 1500 मुलाजिम काम करते हैं तथा आज लगभग सभी काम पर आए हैं।

यूनाइटिड साइकिल एंड पार्ट्स मेन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस चावला ने कहा कि काम धीरे-धीरे पटड़ी पर आ रहा है। वह मजदूरों को समझा रहे हैं तथा करीब 60 फीसदी श्रमिक काम पर लौट आए हैं। जल्द ही काम सामान्य हो जाएगा। ध्यान रहे कि पुलिस लापरवाही के चलते गत शुक्रवार को उग्र प्रदर्शन पर उतारू हुए प्रवासी श्रमिकोंे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद शहर में यह हालात पैदा हुए हैं।

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  • Web Title:तनाव छंटा, भय नहीं
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