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खराब लाइटों से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ी

राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात में गाड़ी संभल कर चलाएं। स्ट्रीट व रेड लाइट खराब होने के चलते इस पर सफर सुरक्षित नहीं हैं। कोहरा पड़ने की स्थिति में मार्ग पर दुर्घटनाओं का कहर बरप सकता है। प्रशासनिक अफसर का इन लाइटों पर अभी तक ध्यान नहीं गया है। ट्रैफिक पुलिस नगर निगम को इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर पल्ला झाड़ रही है तो निगम अफसर बिजली विभाग पर बात टाल देते हैं। सरकारी महकमों के इस लचर तालमेल पर लोगों की जान दांव पर लग रही है।


राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुजरने वाले वाहन रात में तेज स्पीड में बेखौफ दौड़ते हैं। इस साल नवंबर तक हाइवे पर 678 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। जिसमें 211 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें भी अधिकतर दुर्घटनाएं रात में लाइटों की खराब व्यवस्था के चलते हुई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ने वाली शहर की मुख्य सड़कों वाले प्वांइट पर स्थिति चिंताजनक होती है। शहर के प्रमुख चौराहों पर रेडलाइट भी ज्यादातर समय बंद रहती हैं। बार्डर से सराय ख्वाजा, बुढ़िया नाला, बड़खल चौक, ओल्ड चौक, अजरौंदा चौक, बाटा चौक व बल्लभगढ़ दजर्न भर रेड लाइटें हैं। जब इनके होने के बावजूद वाहन चालक पुलिस के बिना डर के गाड़ी दौड़ाते निकल जाते हैं। तो बंद रेड लाइटों में नियम तोड़ना इनके लिए क्या मुश्किल होगा? और यही वजह जाम और दुर्घटना को दावत देती हैं। वहीं स्ट्रीट लाइटों की स्थिति तो इससे भी बदतर है।

रात में स्ट्रीट लाइटें नही जलने से कोहरे में इसका अंजाम भयंकर हो सकता है।
एसीपी ट्रैफिक राजकुमार: रेडलाइट बंद होने पर पुलिस कर्मियों को भी ट्रैफिक नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। अभी कोहरा पड़ना शुरु नही हुआ है। कोहरे में ट्रैफिककर्मी को रात में यातायात नियंत्रण करना मुश्किल हो जाएगा। लाइटों व स्ट्रीट लाइटों का ब्यौरा नगर निगम व एनएचएआई को कई बार भेजा जा चुका है। इन्हें सही करवाना इन विभागों की जिम्मेदारी है।उधर  निगम बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराता है।
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नगर निगम के इलेक्ट्रील विंग के इंचार्ज हरचरण सिंह:सोलर लाइटें लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। सरकार स्तर पर इसका टेंडर हो चुका है

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