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वेतन के पैसे से चुका दिया बिजली का बिल

प्रदेश के सभी नगर निगमों ने वर्षो से बकाया बिजली का भुगतान कर डाला। नतीजा यह हुआ कि नगर निगमों और निकायों में वेतन के लाले पड़ गए हैं। जहाँ निगम कर्मचारियों को एक तारीख के पहले वेतन मिल जाता था वहाँ लखनऊ में ही अभी तक वेतन कर्मचारियों के खाते में नहीं पहुँचा है।

कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, बरेली नगर निगमों में पिछले कुछ महीनों से वेतन नहीं बँटा है। लिहाजा कर्मचारी परेशान हैं। कानपुर तीन महीने से वेतन लटका है। कर्मचारी फरियाद लगा रहे हैं कि वेतन न मिलने से बच्चों की स्कूल की फीस जमा नहीं कर पाए हैं। लखनऊ नगर निगम के कर्मचारी गुफरान के मुताबिक लखनऊ नगर निगम में ऐसे हालात पहले नहीं रहे। अब इसकी भी स्थिति बाकी शहरों जैसी हो गई। 

लखनऊ नगर निगम ने बिजली बकाए के रूप में करीब 70 करोड़ रुपए पावर कार्पोरेशन को अदा किया है। पूरे प्रदेश में नगर निगमों और निकायों पर बिजली विभाग का लगभग तीन अरब रुपया बाकी है। उल्लेखनीय है कि नगर निगमों पर बिजली विभाग का लगभग 15 सालों से कोई भुगतान नहीं हुआ था। बकाया निपटाने का दबाब पड़ा तो बिजली भुगतान कर दिया गया। नतीजतन बाकी खर्चे नहीं निपटच रहे। 

कर्मचारी नेता  शशी मिश्र और अबरार अहमद ने नगर विकास विभाग को पत्र लिखा है कि नगर निगमों की वित्तीय स्थिति में सुधार किया जाए और हर कर्मचारी को हर महीने की पहली तारीख तक वेतन दिया जाए। हिन्दुस्तान ने कई नगर आयुक्तों से इस मसले पर बात करने की कोशिश की।

उन्होंने आर्थिक दिक्कत की बात मानी। लेकिन कोई आधिकारिक बयान देने के लिए तैयार नहीं हुए। प्रमुख सचिव नगर विकास आलोक रंजन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सभी नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को वित्तीय प्रबन्धन ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। 

उन्होंने  कहा कि छठा वेतन आयोग और अन्य भत्ते दिए जाने से नगर निगमों में अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि नगर निगम और निकाय अपनी आय के संसाधन बढ़ाएँ। इसके लिए अधिकारियों को खुद जिम्मेदारी लेनी होगी। आय के स्नोत नहीं बढ़ाए गए तो शासन लापरवाह अधिकारियों को चिह्न्ति कर कार्रवाई करेगा।

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