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सियासत, परिवार और समाज की पुरुषवादी सोच

लड़कियों ने पूछा-आखिर युवा राजनीति में आएँ कैसे? कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने दो टूक कहा..राजनीति की जो दशा-दिशा रही है, उसमें अगर मैं भी सियासी परिवार से न होता तो मुझे भी नहीं मालूम होता कि राजनीति में कैसे आया जाए, पर अब कांग्रेस पार्टी ने रास्ता खोला है। युवक कांग्रेस में शामिल होने के लिए फार्म भरिए, सदस्य बनिए, संगठन का चुनाव लड़िये और नेता बनिए।

गोमतीनगर के अवध स्कूल में राहुल और युवा लड़कियों के बीच हुए संवाद के कार्यक्रम में वक्त बहुत कम था और सवाल ढेर सारे। मीडिया को मौजूद रहने की मंजूरी नहीं थी। हिन्दुस्तान ने संवाद में मौजूद कई लड़कियों से बात की। राहुल ने सभागार में दाखिल होते ही कहा .प्यारी बहनों..।

संवाद में शामिल पेशे से रिक्रूटमेंट कंसल्टेंट फारिया और सोफिया ने बताया- .यूथ कांग्रेस की मेघना पटेल ने सबको पहले ही आगाह कर दिया था कि शादी, अफेयर या इस तरह का कोई निजी सवाल नहीं पूछा जाएगा।

सवालों का दौर शुरू हुआ तो एक छात्र ने पूछा कि समाज में कायम पुरुषवादी सोच से कैसे मुक्ति मिलेगी। राहुल ने जवाब दिया कि ब्रिटिश शासन से देश को कांग्रेस ने आजाद कराया था। पुरुषवादी सोच को बदलने का काम भी कांग्रेस ही करेगी।

पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही फरहा, रेनू और गरिमा के मुताबिक राहुल ने लड़कियों से सवाल पूछा कि कोई तीन ऐसी महिला नेताओं का नाम बताएँ जिनकी उम्र 35 साल से कम हो। इस पर एक लड़की ने एम.करुणानिधि और पीए संगमा की बेटियों का नाम लिया और अंत में जोड़ा कि दो के अलावा तीसरी शायद मैं बनने वाली हूँ। इस पर खूब तालियाँ बजीं।

हालाँकि लॉ-मार्टिनियर गल्र्स कॉलेज की 12वीं क्लास में पढ़ने वाली सोनाक्षी पाण्डेय और शाम्भवी को इस बात की नाराजगी थी कि राहुल काफी देर से आए और सिर्फ 25 मिनट रहे। हम उनसे पूछना चाहते थे कि वे राजनीति में क्यों आए जबकि बचपन से हमें सिखाया गया है कि यह अच्छी जगह नहीं है।

हमें यह भी पूछना था कि आरक्षण व्यवस्था के रहते हुए युवा एकजुट कैसे हो सकते हैं और हम जानना चाहते थे कि बिना क्वालिटी एजुकेशन के देश कैसे तरक्की कर सकता है। पर अफसोस हमें सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिला।

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