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झारखंड को विकास के लिए 1074.03 करोड़ मिले

केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए 1074.03 करोड़ के अंतरिम बजट को मंजूरी दी है। सरकार ने राज्य आयोजना व्यय में 600.49 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी कर दी है। इसे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोक सभा में पेश किया।

अंतरिम बजट के जरिए प्रदान की गई यह अतिरिक्त सहायता खाद्यान्न वितरण मुख्य मंत्री खाद्यान्न सहायता योजना अंत्योदय अन्न योजना, राशन प्रणाली के जरिए चीनी वितरण फसल बीमा योजना आदि में खर्च की जाएगी। संबंधित योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए राज्य ने इस बार में अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की थी।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से लोक सभा में पेश झारखंड के इस अंतरिम बजट में राज्य के सालाना आयोजना व्यय 8200 करोड़ रुपए को उसी स्तर पर बनाए रखा गया है। इसमें कोई कमी नहीं की गई है। यह अतिरिक्त सहायता राज्य में चल रही रेल परियोजनाओं बिजली परियोजनाओं मुख्य मंत्री ग्राम सेतु योजना और स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना और अन्य जनकल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में अतिरिक्त धन की जरूरत को पूरा करने के लिए इस राशि की मंजूरी दी गई है।

सरकार ने गैर आयोजना व्यय के तौर पर 412.30 करोड़ रुपए के व्यय का प्रावधान किया है। यह राशि सूखा राहत में खर्च होगी। राज्य के 24 जिले भारी सूखे की चपेट में हैं। इसमें 300 करोड़ रुपए आपदा राहत कोष के जरिए आएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि मानसून खराब रहने के चलते फिलहाल प्राथमिकता खाद्यान्न की उपलब्धता है। इस समस्या के हल के लिए जरूरी धन का बंदोबस्त किया गया है। इसके अलावा वेतन भुगतान और विश्वविद्यालय अध्यापकों के लिए केंद्र सरकार की ओर से 40.61 करोड़ रुपए का अनुदान मंजूर किया गया है।

दरअसल अतिरिक्त अनुदान मांग 1074.03 करोड़ में राज्य आयोजना व्यय 600.49 करोड़ रुपए रखा गया है और केंद्र की हिस्सेदारी 101.85 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। बाकी 371.69 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर आएगा। अतिरिक्त राजस्व व्यय के लिए 734.24 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया है।

यह सहायता मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं में सहायता बढ़ाने के लिए की गई है। इसके साथ ही बिजली परियोजनाओं ग्रामीण विकास और अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए 339.79 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा है कि प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए 300 रुपए जारी किए गए हैं। राज्य ने महिलाओं के स्वसहायता समूहों (एसएचजी) के लिए एक स्कीम लांच की है। इसका मकसद राज्य में राशन वितरण प्रणाली को दुरुस्त करना है। सरकारी सहायता के जरिए चीनी और खाद्यान्न वितरण शुरू किया गया है।

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