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खनन के राजस्व की हिस्सेदारी से चमकेगा शहर

अरावली में खनन शुरू करवाने के लिए हरियाणा सरकार की तैयारी से शहर के विकास को लेकर नगर निगम को उम्मीद की एक किरण नजर आई है। बिगड़ती माली हालत में खनन के राजस्व से मिलने वाली हिस्सेदारी को ऑक्सीजन के रूप में देखा जा रहा है। अंदाजन सालाना कई करोड़ रुपये निगम को राजस्व मिलने की संभावना तलाशी जा रही है। इसको लेकर निगम हरियाणा सरकार से पत्रचार करेगा। ताकि संभावित नए सिरे से शुरू होने वाली खदानों के राजस्व में उनकी हिस्सेदारी तय की जाए।


दरअसल, अरावली में कई वर्षो तक चली खदानों से निगम को कुछ हाथ नहीं लगा। इस बार मौके को वह हाथ से नहीं जाने देना चाहता। मेजर (बजरी) खदानों से सरकार को तो सालाना करोड़ों रुपये राजस्व मिलता रहा है। निगम खाली हाथ रहा। जबकि नियम के मुताबिक लीज की जमीन के मालिक को खदान से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राशि देने का प्रावधान है। निगम के आधा दजर्न से ज्यादा गांवों के पहाड़ों में खनन हुआ। फरीदाबाद मिश्रित प्रशासन या फिर बाद में बने नगर निगम को इसका कोई पैसा नहीं मिला। निगम ने इस बाबत कलेक्टर कोर्ट में भी केस दायर किया। लीज अवधि खत्म होने के बाद खुदाई से उबड़ खाबड़ हुई जमीन को समतल करने के लिए  रायल्टी से हिस्सेदार की मांग की। मगर लीज अवधि खत्म होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने खनन पर प्रतिबंध लगा दिया। लीज होल्डरों ने बाद में कोई पैसा नहीं दिया।


बहरहाल, हरियाणा सरकार ने खनन शुरू करवाने को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। अरावली में इस बार खनन हुआ तो निगम अपने हिस्से की ताक में है। चुंगी के बाद हाउस टैक्स खत्म करने से निगम की माली हालत प्रभावित हुई है। कर्मचारियों की तनख्वाह निकलाने तक ही निगम सीमित होता जा रहा है। विकास के बड़े प्रोजेक्ट धन अभाव में आहिस्ता-आहिस्ता बंद हो रहे हैं। शहर की टूटी सड़कें निगम की गरीबी की गाथा गा रही हैं।
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खनन विभाग के इंजीनियर एमपी शर्मा: खनन को लेकर सरकार स्तर पर कार्रवाई चल रही है। जिला स्तर पर किसी तरह के आदेश अभी नहीं आए हैं। जो भी सरकारी आदेश होंगे, उन पर अमल किया जाएगा।
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खनन से सरकार को मिला राजस्व
  वर्ष              राजस्व (आकंड़े करोड़ में हैं)
1990-91          4.47
1991-92          4.46
1992-93          7.97
1993-94          9.39
1994-95         11.47
1995-96         12.75
1996-97         29.06
1997-98         25.97
1997-99         34.31
1999-2000      51.24
2000-2001      64.13
2001-2002      87.30
2002-2003      39.54
2003-2004      25.62
2004-2005      24.39

नोट-सन 2004-2005 के आंकड़े अनुमानित हैं।

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