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- जीडीए और निगम की तनातनी में बेकार हुए पार्क

प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम शहरी विकास योजना के तहत सजाए-सवांरे पार्को को भी अब अफसर तवज्जों नहीं दे रहे। योजना के तहत करोड़ों खर्च कर तैयार पार्को के मसले पर जीडीए-नगर निगम की नूराकुश्ती में जनता के करोड़ों रुपए मिट्टी में मिल रहे हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं? कुछ महीने पहले तक हरे-भरे दिखने वाले डेवलप सभी पार्क अब बदहाली के कगार पर हैं। पार्कों की हरियाली भी उजड़ने लगी है, पॉश कॉलोनी कविनगर के दजर्न भर पार्को की बदहाल हालत से अब रेजीडेंट्स में गुस्सा पनप रहा है। स्थानीय पार्षद भी दोनों विभागों से पार्को के मेनटीनेंस की दजर्नों बार गुजारिश कर चुके हैं, लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी इन महकमों के अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी?


हालिया मसला कविनगर जोन के वार्ड 79 का है। पिछले साल शुरू हुए मान्यवर कांशीराम जी शहरी विकास योजना के तहत इस वार्ड का चयन हुआ था। योजना के तहत ही जीडीए ने लगभग छह करोड़ की लागत से वार्ड में पड़ने वाले सभी एक दजर्न पार्कों का सौंदर्यीकरण कराया था। सौंदर्यकरण के बाद पार्को की हालत सुधर गई। सितंबर में जीडीए ने नगर निगम से पार्को की देखभाल करने को कहा, लेकिन निगम अफसर आगे नहीं आए। सितंबर के बाद प्राधिकरण ने अपने माली हटा लिए। पार्को की हालत बद से बदतर होने लगी। इसे लेकर स्थानीय रेजीडेंट्स ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। निगम पार्क लेने को तैयार नहीं है। करोड़ों रुपए की लागत लगने बाद भी दो विभागों की आपसी तनतनी के चलते पार्क बदहाल हैं। पार्षद विजय मोहन का कहना है कि उन्होंने जीडीए और नगर निगम को कई बार लिखित शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दोनों पार्को की देखभाल एक-दूसरे पर डालने लगे हैं। पार्क में लगे पौधे तो बेकार हो गए हैं। पंप खराब हो गया है। झूले टूटने लगे हैं। आलम ये है कि अब तो घास तक सूखने लगी है।

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  • Web Title:जीडीए और निगम की तनातनी में बदहाल हुए पार्क