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जमीन बचाने की लड़ाई को बल मिलेगा

ाठीकुंड गोलीकांड में घायल साइगत मरांडी की पुलिस हिरासत में मौत पर जन आंदोलन से जुड़े लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ छह दिसंबर को काठीकुंड में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें गोली लगी थी। पुलिस ने मरांडी को हिरासत में ले लिया था। रिम्स में उनका इलाज चल रहा था। उनका एक पैर लकवाग्रस्त हो चुका था, साथ ही बेड-सोर की शिकायत भी थी। जनांदोलन से जुड़े लोगों ने कई बार सरकार से उनका इलाज एम्स, नयी दिल्ली में कराने की मांग की थी।सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि सरकार ने एक आंदोलनकारी के साथ सही सलूक नहीं किया। लापरवाही के कारण साइगत की मौत हुई। वह जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे थे। उन्हें गोली लगी थी, फिर भी उन्हें कैदी वार्ड में बेड़ियों में जकड़ कर रखा गया। लोकतांत्रिक और मानवाधिकार की हत्या हुई है।पत्रकार वासवी किड़ो ने कहा कि विकास की बात करने वाली सरकार ने उसका भी सही इलाज नहीं कराया, जिसकी खुशहाली की वह बात करती है। लोग कैसे विश्वास करंगे की विस्थापन के बाद सरकार इतनी बड़ी आबादी की अच्छी देखभाल करगी? आदिवासी छात्र संघ के संरक्षक बेलखस कुाूर ने कहा कि साइगत मरांडी पूंजीपतियों को जमीन दिलाने की कांग्रेसी साजिश के शिकार बन गये। अब कांग्रेस और झामुमो से आदिवासियों का विश्वास उठ चुका है। उनके पास आदिवासियों की रक्षा और उनके विकास के लिए कोई नीति नहीं है। कांग्रेस-भाजपा, दोनों की औद्योगिक नीति आदिवासियों के हित में नहीं है।क्रेा जनमुक्ित आंदोलन के जेरोम जेराल्ड कुाूर ने कहा कि साइगत मरांडी की मौत से जमीन रक्षा आंदोलन को नया बल मिलेगा। लखीराम टुडू और साइगत मरांडी जसों की शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी। विस्थापन का विरोध करने वाले सभी संगठनों को एकाुट हो जाना चाहिए।झारखंड जनाधिकार पार्टी (झाजपा) के अध्यक्ष रतन तिर्की ने दुमका एसपी पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि साइगत मरांडी की शहादत से जमीन बचाने की लड़ाई को बल मिलेगा। साथ ही उन्होंने मृतक के परिानों को दस लाख रुपये मुआवजा देने की सरकार से मांग भी की।

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