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बाल्यकाल में मोटापा होने के नए कारणों की खोज

बाल्यकाल में मोटापा होने के नए कारणों की खोज

वैज्ञानिकों ने यह खोज की है कि डीएनए में एक अहम अंश छूट जाने से बाल्यकाल में मोटापे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह ऐसा पहला अध्ययन है जो दर्शाता है कि अनुवांशिकी बदलाव के चलते मोटापा हो सकता है।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के डॉ़ सादफ फारूकी और वेलकम ट्रस्ट सेंगर इंस्टीटयूट के डॉ़ मैट हर्ल्स ने मोटापे की गंभीर अवस्था से जूझ रहे 300 बच्चों पर अध्ययन करने के बाद पत्रिका नेचर के इस सप्ताह के संस्करण में नतीजे प्रकाशित किए। शोधकर्ताओं के दल ने हर एक बच्चों के जीनोम का अध्ययन कर उसके कॉपी नंबर वेरियंटस [सीएनवी] की पड़ताल की।

सीएनवी डीएनए के बड़े हिस्से होते हैं जो हमारे जीन के जरिये आते हैं या खत्म हो जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन बच्चों को मोटापा होता है उनमें सीएनवी बेजोड़ होते हैं। मोटापे की गंभीर समस्या से जूझने वाले कुछ मरीजों में जीनोम का कुछ हिस्सा लापता होता है। फारूकी के मुताबिक, हमने पाया कि 16 गुणसूत्रों का एक हिस्सा कुछ परिवारों में खत्म हो जाता है और इस समस्या से ग्रस्त लोगों में युवा वय में मोटापे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है।

उन्होंने कहा कि हमारे नतीजे सुझाते हैं कि 16वें गुणसूत्र का एक विशेष जीन एसएच2बी1 वजन नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है और यही रक्त में शर्करा की मात्रा के लियए भी जिम्मेदार होता है।

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