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रुस के साथ गोर्शकोव सौदा संपन्नः विदेश सचिव

रुस के साथ गोर्शकोव सौदा संपन्नः विदेश सचिव

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव की कीमत पर रुस और भारत के बीच समझौता हो गया। राव ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रुस के राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव के बीच हुई वार्ता के दौरान यह मुद्दा उठा।

दोनों नेताओं ने कीमत और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की। राव ने संवाददाताओं को बताया कि मुद्दे का सफलतापूर्वक हल निकाल लिया गया।

विदेश सचिव ने गोर्शकोव की कीमत के बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया। इससे पहले सूत्रों ने कहा कि गोर्शकोव की कीमत दोनों पक्षों के लिए संतोषजनक है। विमानवाहक पोत भारत को कब दिया जाएगा, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस समय तीन दिवसीय रूस दौरे पर हैं। इस दौरान छह द्विपक्षीय सौदों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें असैन्य परमाणु सहयोग के विस्तार का भी एक समझौता शामिल है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रुसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव और रुसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद विदेश सचिव निरुपमा राव ने संवाददाताओं से कहा कि प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दों पर हुई बातचीत में बेहतरीन प्रगति हुई है और इसका कामयाब हल भी निकला है।

विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य (गोर्शकोव) की अंतिम तयशुदा कीमत के बारे में जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं है। मनमोहन की मास्को यात्रा से पहले भारतीय अधिकारियों ने कहा कि एडमिरल गोर्शकोव को फिर से तैयार करने और उसकी सुपुर्दगी की कीमत पर संतोषजनक फैसला हो गया है। इसके साथ ही इन मुद्दों को लेकर चला आ रहा गतिरोध भी खत्म हो गया है।

उन्होंने रविवार को कहा था कि दोनों देश गोर्शकोव पर समक्षौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। भारतीय और रुसी रक्षा अधिकारी दो अरब बीस करोड़ डॉलर के इस विमानवाहक पोत की खरीद कीमत पर पिछले कई वर्षों से बातचीत कर रहे हैं।

रुस अब इस विमानवाहक पोत के लिए 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहा है। यह कीमत 2004 में दोनों देशों के बीच तय हुई कीमत से लगभग तीन गुना अधिक है। लेकिन भारत चाहता है कि इसकी कीमत घटाकर 2.1 अरब अमेरिकी डॉलर की जाए। अधिकारियों ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि संतोषजनक कीमत क्या है, परंतु कहा गया कि यह उसी के बीच है जिस पर दोनों देश चर्चा कर रहे थे।

अपनी यात्रा की पूर्व संध्या पर मनमोहन ने कहा था कि दोनों देश गोर्शकोव समझौते पर गतिरोध को खत्म करने के लिए व्यावहारिक समाधान पर काम कर सकते हैं।

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