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12 अगस्त, 2020|8:52|IST

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महंगी होती रिश्तों की डोर


महंगी होती रिश्तों की डोर

पिछले दिनों बॉलीवुड में दो शादियां हुईं और दोनों ही अपनी-अपनी वजहों से आम जनता के बीच चर्चा का विषय बनीं। पहली शादी थी, बिग ब्रदर की विजेता और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की। शिल्पा ने एनआरआई राज कुंद्रा से कई सालों से चल रहे अफेयर को आखिर शादी में बदल लिया। राज कुंद्रा अप्रवासी भारतीय और करोड़पति हैं और अपनी पहली पत्नी से तलाक ले चुके हैं। शादी की जगह के रूप में रूमानियत के लिए जाने जाने वाले खंडाला को चुना गया। वहां बावा विला की सजावट देख कर किसी फेयरी टेल का-सा अहसास हो रहा था। पूरे लाल रंग में बावा विला को सजाया गया था-वेल्वेट, साटिन, गुलाब और खूबसूरत तरीके से सजाई गई मोमबत्तियां बता रही थीं कि यहां किसी राजकुमारी की शादी होने वाली है और शादी के मंडप को एक दक्षिण भारतीय मंदिर की तरह सजाया गया था। लेकिन आम जनता में जिन चीजों की ज्यादा चर्चा हुई वे थीं, शादी के मौके पर शिल्पा द्वारा पहने जाने वाला महंगा साड़ीनुमा लहंगा, लाखों रुपये का हीरों का हार, रिसेप्शन पर काटे जाने वाला 80 किलो का केक, (इस पर 9 परतों में क्रीम लगी थी) शैंपेन, इटैलियन, चाइनीज, इंडियन और कई देशों का भोजन। पूरा विवाह किसी स्वप्नलोक को साकार करता दिखाई पड़ रहा था। इन्हीं सब चीजों के बीच राज की साली ने जूता छिपाई की रस्म में पांच लाख रुपये की मांग की। हालांकि पहले वह 51 लाख रुपये की मांग करने वाली थीं। राज ने थोड़ी-बहुत नेगोसिएशन के बाद साली को खुशी-खुशी चार लाख रुपये दे दिये। दिलचस्प बात है कि इसी दिन दिल्ली के एक फॉर्म हाउस में होने वाली शादी में एक दूल्हे ने अपनी साली को जूता छिपाई की रस्म में सचमुच 51 लाख रुपये दिये। सालियों को दी गयी इन दोनों ही राशियों ने अचानक उन पुरुषों को हीन सा बना दिया, जो अपनी सालियों को 500, 1000 या 2100 रुपये देते हैं।

तीन बेटियों की 54 वर्षीया मां सरोजा देवी न जाने क्यों इस शादी को देख कर दुखी-सी हो रही थीं। उन्हें लग रहा था कि वे अपनी बेटियों की शादियों में कितना खर्च कर पायेंगी। उन्होंने कहा, टीवी पर शिल्पा की शादी की भव्यता को देख कर मुझे ऐसा लगा रहा था कि अकारण ही कोई मेरे ऊपर इस तरह का दबाव बना रहा है कि मुझे भी अपनी बेटियों की शादी में ज्यादा से ज्यादा तामझाम करना चाहिए। लेकिन एमबीए के बाद एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही 25 वर्षीया हेमा इस शादी से बेहद एक्साइटिड थीं। उनका कहना था, इसमें बुरा क्या है? अगर मेरे बस में हुआ तो मैं भी इसी तरह की भव्य शादी करना चाहूंगी। लेकिन सभी लड़कियां इसी अंदाज में नहीं सोचतीं। वे शिल्पा के समानांतर हुई बॉलीवुड की एक अन्य शादी को उदाहरण मानती हैं। इसमें ईशा कोप्पिकर और व्यवसायी टिमी नारंग ने जुहू के इस्कॉन मंदिर में बेहद सादगी के साथ विवाह किया। इस समारोह में परिवार के कुछ लोग ही शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि मीडिया ने भी शिल्पा की शादी को प्रमुखता देते हुए उसे ज्यादा कवरेज दी। तर्क वही हो सकता है कि शिल्पा की शादी के विजुअल ज्यादा आकर्षक थे। वहीं ईशा की शादी को ज्यादा तरजीह नहीं दी गयी।

बेशक आम जनमानस ने भी शिल्पा की शादी में ज्यादा रुचि ली हो, लेकिन व्यवहार में वह इसे सही नहीं मानता। मध्यवर्गीय 45 वर्षीया मधु के दो बच्चों हैं एक बेटा, एक बेटी। लेकिन उनका साफ मानना है कि इस तरह के दिखावे का समाज पर गलत असर पड़ता है। वह थोड़ी गंभीर होकर कहती हैं, हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां आज भी लाखों लोग केवल एक ही वक्त का भोजन कर पाते हैं। ऐसे में इस तरह के दिखावे का कोई अर्थ नहीं है। ऐसा कतई नहीं है कि उम्रदराज महिलाएं ही ऐसा सोचती हैं। युवा लड़कियां भी इस तरह के दिखावे में यकीन नहीं रखतीं। एमबीए कर चुकी नेहा का कहना है, शादी में इतना शो ऑफ नहीं करना चाहिए। यदि आपके पास बहुत ज्यादा पैसा है तो आप चैरिटी कर सकते हैं। मुझे लगता है कि इस तरह की शादियों के पीछे प्रचार की भावना ही अधिक होती है। कमोबेश यही सोच मार्केटिंग की पढ़ाई के बाद एक अखबार में काम कर रही 23 वर्षीया मानसी की है। वह कहती हैं, शादी जीवन में एक बार होती है, इसलिए इसे यादगार तो बनाना चाहिए, लेकिन अनावश्यक पैसे खर्च करने का कोई मतलब नहीं होता।

हालांकि मध्यवर्ग में दिखावे की परंपरा हमेशा से रही है और हर व्यक्ति बेटी या बेटे की शादी में अपनी क्षमताओं से ज्यादा खर्च करता है। उसका अधिकांश ध्यान इस बात पर रहता है कि लोग ये ना कहें कि शादी में कमी रह गयी। ऐसे में शिल्पा शेट्टी जैसी सिलेब्रेटीज की भव्य शादियां उन्हें और दिखावे के लिए प्रेरित करेंगी। ऐसा भी नहीं है कि सभी सिलेब्रेटीज इसी भव्यता के साथ शादी करती हैं। अजय देवगन और काजोल ने दस साल पहले बेहद सादगी से विवाह किया था और उसमें अजय और काजोल के बहुत करीब लोगों ने ही शिरकत की थी। और हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यह भव्यता और तामझाम कुछ ही समय का होता है। अहम बात यह है कि आप अपने रिश्ते को कितनी गंभीरता से लेते हैं। लोग यह भूल जाते हैं कि राज कुंद्रा की पहली शादी भी इसी भव्यता से हुई होगी। लिहाजा हमें भव्यता से ज्यादा रिश्ते की अहमियत को समझना चाहिए-खासतौर पर एक देश में जहां सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से लाखों शादियां सामुदायिक स्तर पर होती हैं।

बॉलीवुड की सिलेब्रिटीज, जिन्हें आम आदमी अपना रोल मॉडल मानता है, यदि इस दिशा में पहल करेंगी तो लोग उनका अनुसरण करना चाहेंगे, अन्यथा इस तरह की भव्य शादियां जहां एक ओर बिजनेस क्लास में एक होड़ सी पैदा कर देती हैं, वहीं दूसरी ओर  ये मध्यवर्गीय परिवारों के माता-पिताओं पर एक अनदेखा सा दबाव भी बनाती हैं कि उन्हें भी अपनी बेटियों की शादियों में भरपूर तामझाम करना चाहिए।


मुझे मौका मिला और मेरे पास इतनी सुविधाएं हुईं तो मैं भी भव्य शादी करना चाहूंगी, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि मैं लोगों से उधार मांग कर इतनी भव्य शादी करूंगी।- हेमलता, 25 वर्ष

हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां आज भी करोड़ों लोग एक समय का भोजन करते हैं, ऐसे में कोई अपनी शादी पर करोड़ों रुपया कैसे खर्च कर सकता है। आज महंगी शादियां करने की होड़ सी मची हुई है।- मधु गर्ग, 45 वर्ष

शादी में इतना शो ऑफ कभी नहीं करना चाहिए। अगर आपके पास इतना अधिक पैसा है तो आप चैरिटी कर सकते हैं। मैं अपनी शादी में इतना दिखावा पसंद नहीं करूंगी। ऐसी शादियां प्रचार के लिए की जाती हैं।- नेहा, 24 वर्ष

शादी पर बहुत ज्यादा शो ऑफ नहीं करना चाहिए, लेकिन क्योंकि शादी जीवन में एक ही बार होती है, इसलिए यादगार जरूर होनी चाहिए। पर फालतू चीजों पर ज्यादा खर्च करना मुझे अच्छा नहीं लगता।- मानसी, 23 वर्ष

शिल्पा की शादी में जिस तरह से बेपनाह खर्चा हुआ, उससे हमारे जैसे मध्यवर्गीय लोग भी हीन महसूस करने लगते हैं। जिनकी ज्यादा बेटियां हैं, उनके लिए तो इस तरह की शादी की कल्पना ही बेमानी है।- सरोजा देवी, 54 वर्षं

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