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आतंक के साये में गिरा भारत-पाक व्यापार

पाकिस्तान में हाल में हुई आतंकी घटनाआें का असर अब दोंनों देशों के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। अगले वित्त वर्ष में भारत-पाकिस्तान का दुतरफा व्यापार घटकर आधे से भी कम रह जाने की आशंका व्यक्त की गई है। एक ताजा सर्वेक्षण में भारतीय निर्यातकों ने पाकिस्तान के साथ व्यापार करने पर अपनी अनिच्छा जाहिर की है। उद्यमियों और आयातकों से बात करने तथा बाजार की थाह लेने के लिए पाकिस्तान जाने का जोखिम अब कोई नहीं लेना चाहता। निर्यातकों में हाल की आतंकी घटनाआें से डर बैठ गया है। हालांकि सतर्कता तो पहले भी बरती जाती रही है, लेकिन हाल के दिनों में घटी आतंकी घटनाआें के बाद कारोबारियों के कदम थम गए हैं। वाणिय एवं उद्योग मंडल (फिक्की) के ताजा सर्वेक्षण में कहा गया है कि आने वाले महीनों में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार काफी कम होगा। वर्ष 2007-08 में दुतरफा व्यापार 200 करोड़ डॉलर से भी ऊपर निकल गया था, लेकिन ताजा हालातों को देखते हुए 2000 में इसके 60 प्रतिशत तक घटकर 0 करोड़ डॉलर रह जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पिछले पांच-छह सालों में दोंनों देशों कें बीच आधिकारिक तौर पर होने वाले व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2003-04 में जहां दुतरफा व्यापार 35 करोड़ डॉलर पर था वहीं 2007-08 तक यह बढ़कर 200 करोड़ डॉलर से भी ऊपर निकल गया। फिक्की सर्वे में जो बात सामने आई है उसमें निर्यातक हों या फिर आयातक उनका कहना है कि किसी भी बिजनेस डील को पूरा करने के लिए कई बार यात्राएं करनी पड़ती हैं, लेकिन जिस तरह की घटनाएं हो रही है उसे देखते हुए निकट भविष्य में सीधी यात्राएं करना मुश्किल लगता है। यादातर कारोबारी फिलहाल रुको और देखों की नीति पर ही काम कर रहे हैं।

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