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दो टूक (08 दिसंबर, 2009)

नोएडा का निठारी कांड याद होगा। महीनों तक इलाके के बच्चे गायब होते रहे और मारे जाते रहे लेकिन शिकायत करने पर भी पुलिस-प्रशासन के कानों जूं तक नहीं रेंगी। आमतौर पर ऐसे मामलों में पुलिस 24 घंटे बाद ही कोई मामला दर्ज करती है उसमें भी आगे की खोजबीन में टालमटोल कर देती है।

बकौल मानवाधिकारी आयोग, देशभर से हर साल 45,000 बच्चे इसी तरह गायब हो जाते हैं। इनमें से 11,000 का तो कभी पता ही नहीं चलता। विश्वस्तरीय महानगर बनने में मशगूल दिल्ली इसमें सबसे आगे है। निराशा के इस घोर अंधकार में आशा की एक लौ बनकर उभरी है इंदौर की गैर सरकारी संस्था। यह खोए बच्चों को अपने प्रयासों से खोजकर पुलिस को खबर करती है। अपने बूते इस मानवीय कार्य करनेवाली संस्था को समाज का भी पूरा सहयोग मिलना चाहिए।

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  • Web Title:दो टूक (08 दिसंबर, 2009)