class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

थ्री जी का आना

अगले साल के शुरू में जब दुनिया के तमाम देशों में नई पीढ़ी की आधुनिकतम फोर जी टेलीफोन सेवा व्यावसायिक स्तर पर काम करना शुरू देगी तो यहां भारत में हम इससे पिछली पीढ़ी की थ्री जी सेवा शुरू करने के लिए जोड़-घटाव कर रहे होंगे। जिन देशों में अगले साल फोर जी सेवा शुरू होनी है, उनमें स्पैक्ट्रम एलॉटमेंट जैसे बुनियादी काम पहले ही हो चुके हैं और छोटे पैमाने पर कई जगहों पर यह सेवा तो बाकायदा शुरू भी हो चुकी है।

जबकि हमारे यहां अगर सब कुछ पूर्व निर्धारित तारीखों के हिसाब से चला तो इससे एक पीढ़ी पुरानी तकनीक के स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए निविदाएं आमंत्रित करने का काम शुरू हो जाएगा। अगर सब कुछ ठीक चला तो नीलामी अगले साल के दूसरे हफ्ते में ही शुरू हो सकेगी। यह वही तकनीक है, जिसका दुनिया का पहला नेटवर्क मई 2001 में काम करने लगा था। तकरीबन उसी समय जब हमारे यहां संचार नेटवर्क ने थोड़ा-बहुत जमीन पर फैलना शुरू किया था। और तब भी यह काम बहुत आसानी से नहीं हुआ था। दूसरी पीढ़ी के टू जी तकनीक के मामले में भी हम इसी तरह से पिछड़ गए थे।

यहां तक कि जब हमारे पड़ोसी पाकिस्तान तक में लोगों ने मोबाइल फोन पर बात करनी शुरू कर दी थी, हम एल्युमीनियम की तारों के उलङो टेलीफोन नेटवर्क की व्यवस्था में रांग नंबर मिला रहे थे। और जब इसी तकनीक के लिए देश के दरवाजे खोले गए तो लोगों ने नई संचार व्यवस्था को ऐसे अपनाया, जैसी मछली पानी को अपनाती है। आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां देश की लगभग आधी आबादी के पास मोबाइल फोन हैं। 

देश ने मोबाइल फोन को सिर्फ उत्पादन के एक साधन के रूप में ही नहीं अपनाया, बल्कि उसे तरक्की का एक औजार भी बना दिया। हालांकि हमारे पास  यह बताने वाले आंकड़े नहीं हैं कि हर क्षण मोबाइल फोन से होने वाले कारोबार की देश की जीडीपी में कितनी भागीदारी है। लेकिन यह बहुत साफ है कि हम विकास दर की जिस ऊंचाई को छूने में कामयाब रहे हैं, उसमें नई संचार सुविधाओं ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। दिक्कत यही है कि इन सुविधाओं के आने के बाद से देश की जनता ने तो अपना मिजाज बदल दिया पर हमारी राजनीति और नौकरशाही अपना मिजाज नहीं बदल सके हैं। थ्री जी तकनीक को लाने में हो रही देरी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:थ्री जी का आना