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आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर हाईकोर्ट कड़ा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इलाहाबाद शहर में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियाँ- नर्सिग होम, कोचिंग संस्थान, विवाह गृह आदि चलाए जाने एवं विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध कर वसूलने पर कड़ा रुख अपनाते हुए इलाहाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व मुख्य नगर अधिकारी को तलब किया है।

कोर्ट ने उन्हें इस सम्बन्ध में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में बताने को कहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इलाहाबाद से जुड़े शहरों के बीच फोर लेन सड़क बन जाने के बावजूद शहर में बड़े वाहनों को प्रवेश दिए जाने के मामले पर इलाहाबाद के जिलाधिकारी एवं एसएसपी को भी तलब कर बताने को कहा है कि कैसे ये वाहन शहर में घुस रहे हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति वीएम सहाय एवं न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की खण्डपीठ ने कैलाश चन्द्र अग्रवाल की याचिका पर पारित किया है। न्यायालय ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 14 दिसम्बर की तारीख तय की है। याची ने याचिका में आरोप लगाया है कि इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, विकास के नाम पर यहाँ के निवासियों से कई तरह के कर वसूल करता है।

विभाग की अनुमति के बाद ही आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण एवं गतिविधियों की अनुमति दी जाती है। विकास के नाम पर लिया गया धन विकास के लिए न खर्च कर अधिकारियों की जेब में जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि आवासीय क्षेत्र में शादी गृह, कोचिंग संस्थानों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है एवं वे वहाँ फल-फूल रहे हैं।

इतना ही नहीं, त्रिवेणी महोत्सव के नाम पर भी जबरन वसूली की जा रही है। इसके अलावा चार लेन की सड़क बन जाने के बावजूद भारी वाहन शहर में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे शहर वालों को परेशानी तो होती ही है, साथ में दुर्घटनाएँ भी हो रही हैं।

याची का कहना था कि जनता के धन का उचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। उसका यह भी आरोप है कि ओपन एरिया के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है। इस पर न्यायालय ने उपरोक्त आदेश पारित करते हुए याची के मामले में ओपन एरिया के नाम पर की जा रही वसूली पर रोक लगा दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 14 दिसम्बर को होगी।

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