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आशुतोष, भनियारांवाला, गुरमीत राम रहीम सिख संगठनों के निशाने पर

आशुतोष महाराज, प्यारा सिंह भनियारांवाला और गुरमीत राम रहीम सिंह ऐसे तीन नाम हैं, जो लगभग एक से कारणों से सिख संगठनों के निशाने पर हैं। तीनों से ही संबंधित डेरे समय-समय पर पंजाब में विवाद का कारण बनते रहे हैं और अशांति का सामना प्रदेश निवासियों को करना पड़ता है।

मई 2007 में डेरा सच्च सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह द्वारा सलाबतपुर में अपने अनुयायियों को जाम-ए-इंसां पिलाए जाने के बाद बठिंडा क्षेत्र से शुरू हुए विवाद की जकड़ में पूरा पंजाब आ गया था। इससे पहले वर्ष 2001 में गांव धमाणां (जिला रूपनगर) स्थित डेरा भनियारांवाली के प्रमुख प्यारा सिंह भनियारावाला द्वारा लिखे गए ‘भवसागर ग्रंथ’ (इस पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है)  को लेकर विवाद पैदा हुआ और कई दिन माहौल अशांत रहा।

अब दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूर महल के आशुतोष महाराज के सत्संग को लेकर लुधियाना में विवाद उठ खड़ा हुआ है। सत्संग का विरोध कर रहे एक सिख की पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौत ने आग में घी काम किया है। प्रस्तुत है, इन तीनों डेरों से संबंधित विवाद पर एक रिपोर्ट :-

आशुतोष महाराज
करीब 22 साल पहले नूर महल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की स्थापना के कुछ समय बाद से ही इसके प्रमुख आशुतोष महाराज सिख संगठनों के निशाने पर रहे हैं। विभिन्न सिख संगठनों से जुड़े नेताओं के अनुसार मूल रूप से बिहार के रहने वाले आशुतोष ने गुरु ग्रंथ साहिब और सिख गुरुओं के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। इससे भी बढ़कर उनके कार्यक्रमों में गुरुद्वारों की नकल की जाती है।

सिख नेताओं का यह भी कहना है कि संस्थान के कार्यक्रमों में गुरु ग्रंथ साहिब को वेदों का सार कहने के साथ-साथ बाणी का गलत तरीके से उच्चरण किया जाता है और अमृतधारियों को आशुतोष का शिष्य बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसी के चलते उन्हें 1998 में खडूर साहिब, 2000 में तरनतारन और फिर 2002 में एक कार्यक्रम के दौरान सिखों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा।

श्री अकाल तखत साहिब से तो सिखों को यह आदेश जारी कर दिए थे कि वह आशुतोष के अनुयायियों से अपने संबंध तोड़ लें। अब गत शनिवार को लुधियाना में आशुतोष के सत्संग के आयोजन से तो विवाद खड़ा हो ही गया था, लेकिन इस दौरान पुलिस कार्रवाई में हुई एक सिख की मृत्यु ने इसे और भड़का दिया।

प्यारा सिंह भनियारांवाला


धमाणा स्थित डेरा भनियारांवाली के प्रमुख प्यारा सिंह भनियारांवाला का विरोध भी सिख संगठन शुरू से ही करते रहे। श्री अकाल तखत साहिब द्वारा उन्हें दसवें गुरु गोबिंद सिंह की नकल करने का दोषी करार देते हुए अगस्त 1998 में पंथ से निकाल दिया गया। इसके बाद भनियारांवाला ने ‘भवसागर ग्रंथ’ लिखा, जिससे सिखों का गुस्सा उनके खिलाफ और भड़क गया। ऐसा माना गया कि यह ग्रंथ लिखकर भनियारांवाला ने सिख गुरुओं की नकल की है।

वर्ष 2001 में इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए और मोरिंडा पुलिस (जिला रूपनगर) ने प्यारा सिंह भनियारांवाला के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ‘भवसागर ग्रंथ’ को प्रदेश सरकार ने बैन कर दिया। इसके बाद भनियारांवाला पर कई हमले हुए। सितंबर 2003 को भी अंबाला में एक पेशी के दौरान भी उन पर तेजधार हथियार से हमला हुआ।

गुरमीत राम रहीम सिंह


डेरा सच्च सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को लेकर विवाद मई 2007 में शुरू हुआ। सलाबतपुर में डेरा प्रमुख ने जो पोशाक पहनकर अपने अनुयायियों को जाम-ए-इंसां पिलाया, विवाद उससे शुरू हुआ। सिख संगठनों ने कहा कि ऐसा करके डेरा प्रमुख ने गुरु गोबिंद सिंह जी की नकल की है।

उन्होंने इस दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा अमृतपान करवाए जाने के वक्त पहनी गई पोशाक जैसा पहनावा पहनकर खुद को उनके बराबर बताने की कोशिश की है। इसके खिलाफ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुईं। श्री अकाल तखत साहिब ने डेरा मुखी तथा उनके अनुयायियों के साथ कोई भी साङोदारी न रखने के आदेश सिखों को जारी कर दिए।

प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए। पंजाब पुलिस ने गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला भी दर्ज कर लिया। इसकी जांच में शामिल होते हुए डेरा प्रमुख ने पुलिस के समक्ष यह तक कह दिया कि वह गुरु गोबिंद सिंह की नकल करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इसके बावजूद विवाद जारी है और सिख संगठन डेरा प्रमुख के खिलाफ हैं।

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  • Web Title:गैर पंथ के संत सिख संगठनों के निशाने पर