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यूपीटीयू परीक्षा 26 दिसंबर से

हाईस्कूल, इंटरमीडिएट व ग्रेजुएशन की तरह अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कोचिंग सेंटर के हवाले हो गई है। एजूकेशन हब में संचालित टेक्निकल इंस्टीट्यूट के करीब 30 फीसदी छात्र कॉलेज के बाद का समय कोचिंग इंस्टीट्यूट को दे रहे हैं। परीक्षा में आने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न व कम समय में पास होने के टिप्स जानने के लिए छात्र यहां आते हैं। जिले में तीन दजर्न से अधिक ऐसे कोचिंग इंस्टीट्यूट हैं, जो इंजीनियरिंग व एमसीए सहित अन्य डिग्री कोर्स करने वाले छात्रों को तैयारी करवा रहे हैं।


दस हजार में से पचास फीसदी छात्र करते हैं ज्वाइन : एजूकेशन हब में हर साल दस हजार छात्र प्रवेश लेते हैं, जिनमें पचास फीसदी छात्र सेमिस्टर के बीच में कोचिंग सेंटर ज्वाइन कर लेते हैं। इनमें सीएस, आईटी, ईसी व मैकेनिकल इंजीनियरिंग सहित वह अन्य ब्रांच की पढ़ाई करते हैं।


कई टॉपिक कॉलेज में नहीं हो पाते क्लीअर : बीटेक थर्ड इयर के छात्र सजल बताते हैं कि कई टॉपिक्स ऐसे होते हैं जो कॉलेज में क्लीअर नहीं हो पाते हैं। ऐसे में प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट का सहारा लिया जाता है। परीक्षाओं की तैयारी के लिहाज से प्राइवेट कोचिंग सेंटर व ट्यूशन का सहारा फस्र्ट इयर स्टूडेंट अधिक लेते हैं। एमसीए के पास आउट छात्र सुधाकर बताते हैं कि कॉलेज में पढ़ाने का शिड्यूल निर्धारित होता है। वहां पर छात्रों की सभी जिज्ञासाएं शांत नहीं हो पाती हैं। जिसके चलते छात्र कोचिंग सेंटर का रुख करते हैं।


बदल चुके हैं डिग्री के मायने : जीएल बजाज कॉलेज के निदेशक डॉ. राजीव अग्रवाल बताते हैं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के मायने बदल चुके हैं। जहां कल तक कॉलेजों में दिनभर पढ़ाई करने के बाद कंपनियों में काम करने के लिए इंजीनियर निकला करते थे, वहां अब पढ़ाई केवल महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आकर टिक गई है। जिसके चलते कंपनियां भी प्लेसमेंट के जरिए छात्रों का चयन करते वक्त चूजी होती जा रही हैं। डिग्री के मायने बदल जाने के कारण तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता खत्म होती जा रही है।

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