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गंगा की लहरों के साथ हिन्दुस्तान टीम की लम्बी यात्रा

प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत में प्रदेश के एक बड़े अफसर ने कहा कि गंगा मैया अब गंदी नहीं होगी। उसमें कोई भी गंदा नाला नहीं गिरेगा। उम्मीद जगी कि पतितपावनी गंगा अब उतनी ही निर्मल होगी, जैसी मानस में गोस्वामी जी ने लिखी है। लेकिन शायद यह सरासर झूठ है क्योंकि जब हिन्दुस्तान ने गंगा बैराज से जाजमऊ पुल तक दस किलोमीटर की दूरी गंगा मैया की लहरों के साथ तय की तो पता लगा कि गंगा में बड़े-बड़े गंदे नालों का गिरना जारी है।

पानी का रंग काला पड़ चुका है, मछलियाँ मरने लगी हैं। ऐसे जल से भला कैसे आचमन होगा? माघ मेले के दौरान संगम पर श्रद्धालुओं को फिर उसी काले पानी में स्नान करना पड़ेगा। गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिले एक वर्ष से ज्यादा हो गया, मगर उसकी हालत में कोई बदलाव नहीं आया। अलबत्ता उसे मैला न करने का हलफनामा देकर अफसर कोर्ट में झूठ बोल आए हैं। इसी शुक्रवार को इस मामले पर फिर उच्च अदालत बैठेगी। 

हिन्दुस्तान की टीम ने शुक्रवार को करीब छह घंटे तक गंगा की स्थिति का जायजा लिया। नाव पर सवार होकर उसका वह रूप देखा जो सड़क से नहीं दिखता। गंगा बैराज के दो गेटों से निकलती हुई धारा में रामेश्वर घाट का पहला नाला मुख्य धारा में मिलता है। इसे तीन दिन पहले ही नब्बे अंश पर मोड़कर बैराज की ओर लाया गया है।

अभी तक यह नाला तिवारीघाट, बारीघाट और रानीघाट के समानान्तर उस स्थान पर गंगा में मिलता था, जहां से चैनल खोदकर भैरोघाट पम्पिंग स्टेशन तक पानी पहुँचाया जाता है। जल निगम का दावा है कि यह नाला बंद है, मगर यह पूरे वेग से गंगा की धारा को दूषित कर रहा है, सिर्फ उसकी दिशा बदली है।

बैराज से लेकर जाजमऊ तक गंगा में ऐसे 30 से ज्यादा छोटे-बड़े नाले गिर रहे हैं, जिनमें नौ नालों को बंद करने और सभी नालों में लोहे की ग्रिल लगाने, कर्मचारी तैनात करने का दावा गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारी कर चुके हैं।

जलापूर्ति के लिए गंगा से निकाले गए चैनल के पानी में रंग की मात्र 100 हैजेन से ज्यादा हो गई है। आक्सीजन घट गया है। रानीघाट पर हवा में भीषण सड़ांध है। भैरोघाट के श्मशान की राख लगातार नदी में उड़ेली जा रही है। वहां पानी इतना कम है कि नाव चलाना मुश्किल है।

मैगजीन घाट में छोटे-छोटे नालों व घरों के शौचालयों की गंदगी सीधे गंगा में जा रही है। यहां तक तो खैर है। रिवर साइड पॉवर हाउस के बगल में 16 करोड़ लीटर गंदगी 24 घंटे नदी में गिर रही है। आरपीएच के सामने ज्यादा देर रहे तो सड़ांध से दम फूलने लगता है। अस्पताल घाट की रेत पर हजारों सीपियाँ मरी पड़ी हैं। छोटा अस्पताल घाट से छोटी-छोटी नालियाँ गंगा में गिर रही हैं। टैफ्को का नाला बंद है मगर सुलभ शौचालय की गंदगी गंगा में गिर रही है।

परमट घाट के बुर्ज तो रंगीले हैं, मगर हवा में फूलों की सड़ांध और रेत पर कूड़े के ढेर मिलेंगे। घंटा-घड़ियाल की आवाज के बीच परमट नाला गंगा में गिरता हुआ मिला। फर्क यह है कि यह पक्का कर दिया गया है। काली घटिया में नक्काशीदार नाला चोरी से नदी में गिरता है। एनटीसी मुख्यालय के पास बड़े चट्टों का गोबर और कूड़ा सीधे नदी में जा रहा है।

नगर निगम इन चट्टों को नहीं हटा पाया और दावा है नालों का रुख मोड़ देने का। बाबा घाट में झरने की तरह बड़ा नाला गिरता मिला। बुढ़िया घाट, पुलिस लाइन की बड़ी नालियाँ धारा में मिल रही हैं। जिला कारागार के पीछे भी नालों का झरना है। कच्चे घाट में भी छोटे नाले हैं। गुप्तार घाट, मुरब्बा घाट, भगवतदास घाट, मसान घाट में चार बड़े नाले गंगा को मैला करने में लगे हैं।

झाड़ी बाबा का पड़ाव का नाला अभी तक नदी में गिर रहा है। धोबीघाट के ठीक बगल में टेनरियों की गदंगी लेकर आने वाला बड़ा नाला पानी के रंग और सीरत को और भयावह बना देता है। सत्ती चौरा और मैस्कर घाट में हालात कुछ ठीक हैं मगर जाजमऊ की टेनरियों का इलाका शुरू होते ही छोटे-बड़े नाले सड़ांध के साथ नदी में मिल रहे हैं। डपकेश्वर घाट में दो बड़े नाले गंगा के मूल स्वरूप को नष्ट कर रहे हैं। वहां बेहोश करने वाली तीक्ष्ण गंध है। छोटी-छोटी धाराएँ टेनरियों और घरेलू सीवर की गंदगी लेकर नदी में मिल रही हैं। एक किलोमीटर के हिस्से में आधा दजर्न छोटे नालों से कारखानों का पानी सीधे नदी में गिरता है। बंगाली घाट का नाला चुपचाप गिर रहा है और जाजमऊ का गंगापुल पार करते-करते हालात भयावह हो गए हैं।
सिद्धनाथ घाट और मनोहरलाल घाट को पार करते-करते नदी में आधा दजर्न से अधिक चोर नाले छोटी-छोटी धाराओं के जरिए उड़ेले जा रहे हैं। जाजमऊ के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकला आखिरी नाला गिरने के बाद जब गंगा शहर से संगम की ओर विदा होती है तो उसमें अभी तक इस शहर का 50 करोड़ लीटर से अधिक सीवरेज उड़ेल दिया जाता है।

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