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चुनावी तैयारियों के बीज बो गए कुँवर

अस्सलाम वालेअकुम.. जैसे ही एएमयू के कैनेडी हॉल में राहुल आए, उनके मुँह से निकलने वाले ये पहले शब्द थे। काँग्रेस महासचिव राहुल गाँधी पूरी तैयारी के साथ अलीगढ़ आए और पूरे उत्साह के साथ लोगों से रूबरू हुए। मीडिया से दूरी बनाते हुए सोची समङी रणनीति के तहत राहुल 2012 के चुनावी तैयारी के बीज बो गए।

वे यूथ काँग्रेस के सदस्यों के दिमाग की चाभी अभी से टाइट कर गए कि टिकट या पद लेना हो तो जमीनी स्तर पर काम करें, तभी उनकी दावेदारी के बारे में सोचा जाएगा। जवाहर भवन में उनका कार्यक्रम तो था छात्रों से रूबरू होने का, लेकिन सिर्फ पाँच मिनट का संक्षिप्त भाषण और पाँच छात्रों के सवालों का जवाब देने के बाद उन्होंने सिर्फ यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही गुरुमंत्र दिए।

राहुल का अलीगढ़ दौरा सियासी लोगों में सुगबुगाहट दे गया। लिब्रहान कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश हो चुकी है। छह दिसंबर को मुस्लिम नेता विवादित ढाँचा विध्वंस की बरसी मनाते हैं। वहीं सात दिसंबर से लिब्रहान की रिपोर्ट पर संसद में चर्चा होनी थी। ऐसे में मुस्लिम नेताओं को मरहम लगाने और मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने के लिए राहुल ने एएमयू को चुना।

वे एएमयू तो आए, लेकिन बच्चों से नाम करने भर के लिए ही रूबरू हुए। इसकी जगह उन्होंने ज्यादा समय संगठन के लोगों को 2012 चुनाव की रणनीति समझाने में बिताया। शायद इसीलिए मीडिया को भी दूर ही रखा गया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को अभी से जुट जाने और जमीनी स्तर से काम करने की सीख दी। राहुल का यह दौरा तो खत्म हो गया, लेकिन सियासत की हवा में सरगर्मी बढ़ा गया। राहुल के दौरे में साफ संदेश था कि अब यूपी की बारी है।

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