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हिंडन वन की तबाही में फंसे अफसर

- वन विभाग ने लादे अफसर-ठेकेदारों पर केस
- सड़क बनाने के नाम कटवा डाले सैकड़ों पेड़
- डीएफओ ने रुकवाया हिंडन सड़क का काम
 
गूंजा दिल्ली-लखनऊ

- चीफ कन्जरवेटर ने लखनऊ मंगाई पूरी रिपोर्ट
- अफसरों पर केन्द्रीय स्तर से भी होगी कार्रवाई
- फिलहाल नहीं बन रहा हिंडन-यूपी बार्डर रोड

 हरा-भरा हिंडन वन उजाड़ना गाजियाबाद के अफसरों को बहुत मंहगा पड़ गया है। हिंडन कट नहर से यूपी बार्डर तक रोड बनाए जाने के नाम पर बिना अनुमति सैकड़ों पेड काट दिए गए। वन संपदा की तबाही देखकर हरकत में आए फोरेस्ट अफसरों ने सिंचाई विभाग के जिला प्रमुख समेत कई ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए हैं। चार हजार से अधिक वृक्षों पर खतरा मंडराता देख विभाग ने सड़क का काम भी रुकवा दिया है।
हिंडन फोरेस्ट उजाड़े जाने का मामला फिलहाल दिल्ली-लखनऊ में गूंज रहा है और सिंचाई विभाग की फजीहत हो रही है। वन अफसरों के मुताबिक, प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश ने डीएफओ गाजियाबाद से मामले की जांच रिपोर्ट तुरंत लखनऊ भेजने को कहा है। पहले ही इस मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी द्वारा पर्यावरण सचेतक समिति इस मामले में रिट दायर कर चुकी है। आगे वन उजाड़ने के दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर केन्द्र और प्रदेश शासन के स्तर से भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि सिंचाई विभाग ने गाजियाबाद के हिंडन कट नहर पर सड़क निर्माण का काम शुरू कराया था। सड़क सिंचाई विभाग को बनवानी थी और पैसा जीडीए को खर्च करना था। प्रभागीय वानिकीय निदेशक वाईपीएस मलिक ने हिन्दुस्तान को बताया कि सिंचाई अफसरों ने बिना अनुमति के ही पहले हिंडन वन के करीब 1596 हरे-भरे पेड़ कटवा दिए। फोरेंस्ट रेंज अफसर की जांच के बाद इस सम्बंध में दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर वन अधिनियम 1927 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केस दर्ज करा दिए गए हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेशों की आगे अवहेलना न हो, इसके लिए सड़क का निर्माण भी रुकवा दिया गया है, ताकि बाकी बचे 4710 वृक्ष सुरक्षित रहें। अब प्रमुख वन संरक्षक को मामले की रिपोर्ट भेजी जा रही है।

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