class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मंदी से पिघला फौलाद

मंदी की मार ने फौलाद को पिघला दिया है। वेस्ट यूपी की सबसे बड़ी लोहा मंडी में सौदे नहीं हो रहे। उत्पादन करने वाली कई इकाई बंदी की कगार पर हैं। एक फीसदी एंट्री टैक्स ने उद्यमियों की मुश्किल बढ़ा दी है। डिमांड न होने के कारण लोहे के रेट एक लास में आधे हो गए हैं।


रियल स्टेट सेक्टर में आई मंदी लोहा व्यापारियों को रुला रही है। गाजियाबाद लोहा मंडी में करोडों के सौदे होते थे, लेकिन अब यहां सन्नाटा है। शहर के औद्योगिक इलाकों में उत्पादन करनी वाली इकाईयों ने उत्पादन घटा दिया है। गाजियाबाद लोहा व्यापार मंडल के अध्यक्ष ब्रजमोहन सिंघल कहते हैं कि बीते साल लोहा 50 से 55 रुपए किलो हो गया था। अब इसका मार्केट रेट घटकर पच्चीस से तीस पर आ गया है। चादर और सरिया बनाने वाली फैक्ट्री परेशान हैं। रियल स्टेट में प्रोजेक्ट रूके हैं और ऐसे में मार्केट से लोहा नहीं उठ रहा। प्रदेश सरकार ने एक फीसदी एंट्री टैक्स लगा दिया है। डिस्टिक चेंज करने पर भी यह टैक्स लगता है। इसके चलते व्यापार ठप्प हो गया है। लोहा कारोबारी सुरेंद्र कुमार गर्ग बताते हैं कि कई इकाईयों में उत्पादन कम हो गया है। कभी व्यापारी को मालामाल करने वाला लोहा व्यापार अब उसके लिए मुसीबत बना है।

लोहे की मुश्किल
-प्रदेश सरकार ने लगाया एक फीसदी एंट्री टैक्स
-पचास रुपए किलो से रेट गिरकर पच्चीस पर पहुंचे
-चार रुपए यूनिट की दर पर मिलती है बिजली
-बिजली कटौती से है हाल-बेहाल
-वेस्ट यूपी की सबसे बड़ी लोहा मंडी पर संकट

उत्तराखंड का सहारा
परेशान कारोबारियों को उत्तराखंड सहारा नजर आ रहा है। यूपी में चार रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है, जबकि उत्तराखंड में यह 3.50 की दर पर है। इसके अलावा एक्साइज डय़ूटी में छूट है। प्रदेश सरकार कारोबार को प्रोत्साहित कर रही है, जबकि यूपी में मंदी के बाद भी टैक्स लगाया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मंदी से पिघला फौलाद