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30 साल पुरानी कसम तोड़कर वोट देंगे दादाजी

वोटर लिस्ट में आए दिन होने वाली गड़बड़ी के किस्से तो आम हैं, पर इससे नाराज होकर लगभग 30 साल पहले (फिर कभी) वोट नहीं देने की कसम उठा लेने वाले झारखंड के एक वृद्ध का गुस्सा अब लगभग सौ साल की उम्र पूरी होने के बाद शांत हुआ है और उन्होंने राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान अपने मताधिकार का प्रयोग करने की इच्छा जताई है।

झारखंड के सराय केलाखरसावां जिले के उदयपुर गांव निवासी सहज महतो आखिरी बार लगभग 70 साल की उम्र में वर्ष 1980 में सातवीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में तत्कालीन बिहार की सिंहभूम सीट के मतदाता की हैसियत से वोट डालने गए थे। तब उन्हें इस बात पर काफी गुस्सा आया था कि वोटर लिस्ट में उनकी जगह किसी महिला का नाम था। वह वोट नहीं डाल सके और नाराज होकर फिर कभी मतदान नहीं करने की कसम उठा ली और इस पर अटल भी रहे।

अब लगभग सौ साल के हो चुके महतो इस बार राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए अपने क्षेत्र सरायकेला में 18 दिसंबर को होने वाले मतदान में वोट डाल कर अपनी कसम तोड़ देंगे।

अपनी नाराजगी के अचानक खत्म होने के बारे में वह अपनी पोपली बोली के बावजूद अपने नाम की तरह काफी सहज तरीके से कहते है कि उन्हें लगता है कि शायद उड़िया भाषा में किए गए उनके हस्ताक्षर के कारण पैदा हुई गलत-फहमी के चलते ही उनका नाम महिला जैसा हो गया था। इसलिए अब उन्हें वोट डालने की जिम्मेदारी का एहसास हो रहा है।

बहरहाल गलती सुधर गई है और महतो वोट डालने को तैयार हैं, पर मतदान से पहले इस बार वह हस्ताक्षर नहीं करेंगे अंगूठा लगाएंगे। ताकि आने वाले किसी और चुनाव में उनको साथ इस तरह की परेशानी न हो।

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