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रूप बदलकर और घातक हुआ एच1एन1

रूप बदलकर और घातक हुआ एच1एन1

देश में छह सौ से भी अधिक लोगों को मारने वाला एच1 एन1 वायरस अपनी रंगत बदलकर और मजबूत हो गया है। ऐसी जानकारी मिली है कि यूरोप में कई जगहों पर इससे लड़ने के लिए बनाई गई दवा टैमीफ्लू बेकार हो रही है। इसी कारण केंद्र सरकार की भी चिंता गहराने लगी है।

नीदरलैंड में स्वाइन फ्लू के मामलों में यह पाया गया है कि वायरस ने अपना कोड बदला है। इससे यह लोगों को बहुत तेजी से संक्रमित कर रहा है। इसके कोड बदलने से स्थिति के भयावह होने का डर बन गया है। ऐसा पाया गया है कि कम तापमान में यह वायरस अपना कोड आसानी से बदल लेता है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि पक्षियों के शरीर का तापमान (41 डिग्री सी) मनुष्यों के शरीर के तापमान तकरीबन 37 डिग्री से अधिक होता है। यानि कि मनुष्य में यह कम है और श्वास नलिका में तो इसका तापमान सिर्फ 33 डिग्री होता है। इसी कारण यह वायरस मनुष्य में आसानी से अपनी रूप को बदल रहा है। अपना कोड बदलने पर यह और भी घातक हो जाता है क्योंकि इसे दूर करने वाली दवा बेअसर हो जाती है, जिससे इससे लड़ने के लिए नए सिरे पूरी कवायद करनी पड़ेगी।

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह वायरस और भी घातक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अधिकारी ने बताया कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के स्वाइन फ्लू बीमारी के चपेट में आ जाने का खतरा अधिक होता है। पूरी दुनिया में अगस्त से नवंबर महीने में इस तरह के 96 लोगों में टैमीफ्लू दवा का असर नहीं होने की रिपोर्ट मिली है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट अमेरिका, जापान, हांगकांग, डेनमार्क, कनाडा और सिंगापुर से मिली है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े भी यही साबित कर रहे है कि यह बीमारी अब और तेजी से पैर पसार रही है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि पिछले सप्ताह के दौरान विश्व भर में एच-1एन-1 फ्लू ( स्वाइन फ्लू) से मरने वालों की संख्या एक हजार से अधिक है। इसमें आधे से ज्यादा मरीज अमेरिकी क्षेत्र के हैं। कनाडा और अमेरिका में एनफ्लूएंजा बड़ी तेजी से फैल रहा है। इसके अलावा यह खतरनाक वायरस यूरोप सहित विश्व के अन्य हिस्सों में भी अपने पैर पसार रहा है।

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