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साल्विया स्पेलेन्डस

साल्विया स्पेलेन्डस

हमारे सुगन्धित औषधीय पौधे तुलसी व पुदीने के सम्बन्धी कई अन्य औषधीय व सुन्दर फूलों वाले पौधे भी हैं, जैसे रंग-बिरंगे पत्तों वाला कोलियस, सुगन्धित रोजमेरी, थाइम, लेवेन्डर, मोलूसेला लेवीस (बेल्स ऑफ आयरलैंड) आदि। इन्हीं में से एक है रक्तवर्णी सुर्ख फूलों वाला साल्विया स्पेलेन्डस। इन सभी पौधों की विशेषता इनकी सुगन्धित कटावदार छोटी-छोटी पत्तियां और खुले मुंह जैसे फूल हैं, जिनके बीच में से एक पंखुड़ी जीभ की तरह बाहर की ओर निकली होती है। टहनी के अग्र भाग में इनका लम्बा-सा पुष्प-गुच्छ खिलता है और अपने इस जीभ जैसी बाहर की ओर निकली पंखुड़ी के कारण अत्यन्त आकर्षक लगता है। फूलों का गुच्छा पांच से छ: इंच तक लम्बा होता है। गहरे हरे रंग के पत्तों के ऊपर यह पुष्प-गुच्छ चार से छ: इंच मोटी लाल चादर की तरह फैला अत्यन्त कमनीय लगता है। इस परिवार ‘लेबीएट’ के पौधों की टहनियां कुछ-कुछ चौकोर होती हैं और पत्ते छोटे व हल्के कटावदार होते हैं एवं लम्बी कटोरी जैसे फूल के बीच से लम्बी जीभ के समान पंखुड़ी निकली रहती है, जो अक्सर विपरीत रंग की होती है और फूल को आकर्षक बनाती है।

साल्विया ऊंचाई में चार से छ: फीट ऊंचाई तक चला जाता है। यूं तो यह शीत ऋतु का एकवर्षीय पौधा है, परन्तु यदि गर्मियों में इसे  छायादार ठंडे स्थान में रखकर पानी देते रहें तो पौधा दो वर्ष तक फूल दे देता है। बीज लेने के बाद इसकी टहनी ऊपर से बीच वाले स्थान तक काट दें। अक्टूबर में इन्हीं पौधों को नई खाद-मिट्टी में पुन: लगा दें। यदि क्यारी में हो तो क्यारी की सफाई, गुड़ाई करके खाद मिला दें। पौधे की बीमार कमजोर टहनियों को काट कर पौधे को सही गोलाकार आकार दे दें। गमला हो या क्यारी, गुड़ाई होती रहनी चाहिए। क्यारी सूखने पर ही पानी दें।

साल्विया में सुर्ख लाल रंग के अतिरिक्त गहरे मैरुन, हल्के पीले व गुलाबी रंग के फूल भी होते हैं। परन्तु जो आकर्षण लाल रंग में है, वह किसी और में नहीं। इसमें अब बौनी किस्म भी आ गई है, जिसका पौधा मात्र आठ से दस इंच ऊंचा होता है। गमलों में लगी या फिर ऊंचे फूलों के आगे क्यारी में लगी बौनी किस्म अत्यन्त सुंदर लगती है।

साल्विया अत्यन्त दृढ़ प्रकृति का पौधा है। इसको अधिक देखभाल की जरूरत नहीं करनी पड़ती। हां, लम्बे पौधों में खपच्ची अवश्य लगानी पड़ती है। छोटे पौधों के अग्र भाग की कोंपलों को बीच से नोचने से टहनियां बढ़ती हैं व पौधा झाड़ी का आकार ले लेता है। क्यारी में पौधा आठ इंच के फासले पर व गमले में एक ही पौधा लगाना चाहिए। इसका फूल काटकर फूलदान में लगाने पर मुरझा जाता है। अत: इसके फूल को काटने की कोशिश न करें। यह फूलदान में लगाने योग्य नहीं है।

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