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सीमा की घेरेबंदी में आड़े आ रहा कच्छ का रण

सीमा की घेरेबंदी में आड़े आ रहा कच्छ का रण

घुसपैठ रोकने के लिए गुजरात से लगी भारत-पाक सीमा पर जल्द-से-जल्द कंटीले तार लगाने के काम में कच्छ के रण का दलदली, बंजर और उबड़-खाबड़ भू-भाग एक बड़ी बाधा पैदा कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में सीमा पर कंटीले तार लगाने का काम पूरा हो चुका है जबकि कच्छ के रण के भू-भाग की वजह से यहां का काम काफी धीमे चल रहा है। इस बाबत सीमा सुरक्षा बल के उप-महानिरीक्षक विष्णु दत्त ने बताया कि घेरेबंदी का काम यहां भी जारी है लेकिन कच्छ के रण के अजीबोगरीब होने की वजह से काम धीरे चल रहा है क्योंकि जमीन के धंसने की आशंका बनी रहती है।

कच्छ के रण के हालात को समझाते हुए दत्त कहते हैं कि कच्छ का रण हर साल मई से सितम्बर तक पानी से भरा होता है। इसके बाद, भू-भाग के कुछ हिस्से गीले रहते हैं जबकि कुछ सूख जाते हैं, लेकिन वह भी अंदर से नम रहते हैं जिससे किसी भी वक्त जमीन धंसने की आशंका रहती है। भारत और पाकिस्तान के बीच मान्यता प्राप्त अंतिम सीमा चौकी पिलर संख्या 1175 पर खड़े होकर उन सफेद पिलर को देखा जा सकता है जहां से पाकिस्तान के राज्य-क्षेत्र की शुरुआत होती है। पिलर संख्या 1175 लखपत से कुछ ही किलोमीटर दूर है।

गुजरात से लगी भारत-पाक सीमा पर 340 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के अलावा घेराबंदी कराए जाने की मंजूरी दी गई थी जिसमें अब तक 219 किलोमीटर सड़क का निर्माण-कार्य पूरा हो चुका और घेरेबंदी का काम भी कमोबेश पूरा किया जा चुका है। गौरतलब है कि यह निर्माण केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कराया जा रहा है।

गृह मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, करीब 121 किलोमीटर क्षेत्र में घेरेबंदी और सड़क निर्माण-कार्य बाकी है। केन्द्र सरकार की पहल के तहत सीमा सड़क को सुरक्षित बनाने और कंटीले तार से सीमा की घेरेबंदी का काम कराया जा रहा है जिससे सीमा पार से घुसपैठ और हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाई जा सके। भारत-पाक सीमा के नजदीक फ्लडलाइटस भी लगाई गई हैं। केन्द्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की घेराबंदी के लिए बजट में 380 करोड़ के आवंटन को सीधा तिगुना कर 1201 करोड़ रुपये कर दिया है।

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