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फण्ड ने दिया एफडी से ज्यादा

फण्ड ने दिया एफडी से ज्यादा

मंदी के दौर में बैंकों ने एफडी पर दस फीसदी तक ब्याज दरें देना शुरू कर दिया था। ऐसा होते ही बैंकों में एफडी कराने वालों की लाइन लग गई थी। एक समय ऐसा भी आया था कि स्टेट बैंक को कई दिन तक रोज एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की एफडी मिल रही थी। अब समय आ रहा है जब यह एफडी पूरी होगी और एक लाख जमा करने वाले को मिलेगा एक लाख दस हजार रुपए। लेकिन इस पर आयकर भी देना होगा। दूसरी तरफ इन्हीं बैंकों के शेयरों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फण्ड रहे। इन म्यूचुअल फण्ड में जिन्होंने निवेश किया होगा उनका पैसा इस दौरान दोगुने से ज्यादा हो चुका है।

अगर ध्यान दिया जाए तो बैंकिंग क्षेत्र के म्यूचुअल फण्ड में निवेश करने वालों को पिछले एक माह में ही करीब सात-आठ फीसदी का रिटर्न पा चुके हैं। यह रिटर्न भी अभी बैंकों की एफडी के ब्याज दरों से ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि म्यूचुअल फण्ड में निवेश का मौका निकल चुका है। यह ऐसा बाजार हैं जहां हरदम निवेश का मौका रहता है। बस जरूरत बाजार के साथ चलने की होती है, न कि बाजार से आगे निकलने की। अगर मंदी से पहले फायदे में लोग नहीं निकल पाए थे तो मंदी में निकलने से फायदा ही क्या रहा। मंदी के दौरान तो निवेश करना चाहिए था। हालांकि यह आज कहना अच्छा लग रहा है लेकिन उस दौरान लोग इस बात को सुनना नहीं चाह रहे थे। लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी लोग सिर्फ पैसा निकाल ही रहे थे। अगर ज्यादातर पैसा निकाल रहे थे तो कुछ लगा भी रहे थे। और जिन्होंने रिस्क लिया अब रिटर्न भी उन्हीं को मिल रहा है।

आगे भी जो निवेश करेगा फायदा उसी को मिलने की उम्मीद होगी। बस जरूरत है बाजार की तेजी और मंदी को संतुलित करने की। निवेश से पहले अपना लक्ष्य तय करें। लेकिन यहां पर लक्ष्य साल या छह माह का न हो। निवेश कम से कम तीन साल के लिए जरूर हो अगर समय इससे भी ज्यादा रहे तो और अच्छा है।

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