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6 जून, 2020|10:56|IST

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दो टूक (07 दिसंबर, 2009)

मंदी और महंगाई के बीच देश के व्यापारी एक नई लड़ाई के लिए गोलबंद हो रहे हैं। यह लड़ाई बाजार में उत्पादों के बीच नहीं लड़ी जाएगी। सेल्स टैक्स, वैट और जीएसटी के मकड़जाल में उलझे कारोबारियों का कहना है कि उनका संघर्ष न्यायसंगत कर व्यवस्था के लिए है।

मुनाफाखोरी और कर चोरी के भले जितने आरोप व्यापारियों पर लगें लेकिन तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि कर ढांचे में पैठे भ्रष्टाचार, व्यापारियों के उत्पीड़न और घरेलू बाजार पर घात लगाए बैठी विदेशी कंपनियों की चुनौती के बीच अपने कारोबारियों को हमने अकेला छोड़ दिया है।

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  • Web Title:दो टूक (07 दिसंबर, 2009)