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ग्लेशियर पर आंच

गंगोत्री ग्लेशियर के बारे में इसरो की ताजा तस्वीरें चौंकाने वाली हैं। पिछले तीस वर्षो में वह डेढ़ किलोमीटर घट गया है। पचास मीटर सालाना की दर से होने वाला यह ह्रास ग्लोबल वार्मिग के चलते है या इसकी स्थानीय वजह है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जहां पूरी दुनिया में ग्लेशियरों के पिघलने की वजह जलवायु परिवर्तन को बताया जा रहा है, वहीं हमारे पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और इसरो के ही एक वैज्ञानिक आर. आर. नलगुंद का मानना कुछ और ही है।

उनका कहना है कि यह ग्लेशियर युगों के बीच की एक परिघटना भी हो सकती है और इसकी स्थानीय वजहें भी संभव हैं। चूंकि हमारे पास बेसलाइन के आंकड़े नहीं हैं इसलिए हम जलवायु परिवर्तन के असर के बारे में वैज्ञानिक राय नहीं दे सकते। मतभिन्नता की इन स्थितियों के बावजूद तथ्यों पर कोई विवाद नहीं है। उनसे यह स्पष्ट होता है कि हमारे ताजे पानी का भंडार छीज रहा है और इसका असर गंगा जैसी महत्वपूर्ण नदी और हिमालय कीसंपूर्ण जलवायु पर भी पड़ेगा।

ग्लेशियरों का पिघलना अपने आप में गड़बड़ घटना नहीं है। गड़बड़ी तब होती है, जब जिस गति से ग्लेशियर बनते हैं, उससे ज्यादा तेजी से वे पिघलने लगते हैं। यानी उनका संतुलन बिगड़ जाता है। पृथ्वी का चार डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने की जो आशंका सदी के अंत तक जताई जा रही है, उसके कारण सदी के आरंभ में ही इतना बड़ा दुष्परिणाम शायद न दिखाई पड़े।
   
इसका मतलब यह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन के लिए आज से कोपेनहेगन में शुरू होने वाला वैश्विक सम्मेलन वायवीय आशंकाओं पर आधारित है। बात सिर्फ इतनी है कि जब तक हम पर्यावरण की किसी गड़बड़ी की ठीक वजह पहचानेंगे नहीं तब तक उसका इलाज नहीं कर पाएंगे। यह ठीक है कि नेपाल की कैबिनेट बैठक जब एवरेस्ट के आधार शिविर में होती है तो उसकी तरफ मीडिया का ध्यान जाता है । लेकिन इन प्रतीकात्मक कदमों से समस्या का समाधान नहीं होता।

हिमालय की पर्यावरण समस्या के समाधान के लिए ठोस इलाज करने होंगे। हिमालय की पर्यावरणीय क्षति के लिए उसके विभिन्न इलाकों में होने वाले मानवीय हस्तक्षेप बहुत हद तक जिम्मेदार हैं। कभी ट्रैकिंग तो कभी पर्यटन के बहाने एवरेस्ट से गंगोत्री तक की जलवायु को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हिमालय के उत्तरी हिस्से में चीन ने भी रणनीतिक और ढांचागत विकास के बहाने काफी तोड़फोड़ की है। जाहिर है पर्वतीय इलाकों में विकास की परिभाषा पर्यावरण रक्षा के इर्द-गिर्द घूमेगी।

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