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बनाएं बायोटेक्नोलॉजी में शानदार भविष्य

पिछले एक दशक में बायोटेक्नोलॉजी विज्ञान के बहुआयामी और रोजगारपरक क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसमें कई क्षेत्र जैसे कि स्वास्थ्य, कृषि, चिकित्सा, पशुपालन, उद्योग और पर्यावरण आदि शामिल हैं। हिन्दुस्तान और इंटेल की करियरफ्यूचर सीरिज की पांचवीं कड़ी में आज हम चर्चा करेंगे बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े करियर्स की।

बायोटेक्नोलॉजी एक रिसर्च आधारित विज्ञान है जो बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी का कांबिनेशन है। इसमें कई विषय जैसे कि जेनेटिक्स, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, विरोलॉजी, केमिस्ट्री, इंजीनियरिंग, हेल्थ एंड मेडिसन, एग्रीकल्चर एंड एनीमल हसबेंडरी, क्रापिंग सिस्टम और क्राप मैनेजमेंट, इकोलॉजी, सेल बायोलॉजी और बायोस्टेटिस्टिक्स आदि। दिन-ब-दिन बायोटेक्नोलॉजी का क्षेत्र एडवांस होता जा रहा है। वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारियां एकत्रित करने और उनका विश्लेषण करने के के काम ने  कंप्यूटर की आवश्यकता को बढ़ाया है। ऐसे में बायोटेक्नोलॉजी और कंप्यूटर के मिश्रण वाला क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। इंटरनेट टूल, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और अन्य एडवांस मैथड में डीएनए सिक्वेंसिंग द्वारा जनरेट होने वाले डाटा को एकत्रित और विश्लेषित करने का काम किया जाता है। कंप्यूटर द्वारा बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शोधकार्य किए जा सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजी की पॉपुलरिटी और ग्रोथ के बढ़ने की वजह से इस क्षेत्र में कई संभावनाएं बनी हैं।

जानकारियों को एकत्रित करना
डीएनए एक मॉलीक्यूल होता है जो कि सुगर, फास्फेट और बेस से मिलकर बना होता है। विभिन्न बेस के कांबिनेशन से पौधों, बैक्टीरिया, यीस्ट और फंगी में डीएनए बनता है। कंप्यूटर इन जानकारियों को  एकत्रित और मैनेज करने का काम करता है।

डाटा विश्लेषण
कंप्यूटर का प्रयोग एक डीएनए सिक्वेंस का अन्य मिलते-जुलते डीएनए सिक्वेंस से तुलना करने के काम आता है।

रिकॉर्ड सिस्टम
बढ़ती जानकारियों, जीनोम का नया डाटाबेस सिस्टम, जीन, फंगी, बैक्टीरिया जीनोम कोड सीक्वेंस आदि को लगातार विकसित किए जाने की वजह से उनका रिकॉर्ड रखा जाने लगा है।

विभिन्न जगहों पर इस्तेमाल
बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की दवाइंयों और खनिज धातुओं को परिष्कृत करने के काम में भी होता है। बायोटेक्नोलॉजी की सहायता से अधिक पैदावार देने वाली फसलें भी तैयार की जा रही हैं। वहीं इसका प्रयोग जीव-जंतुओं और पौधों में आनुवांशिक प्रवृत्तियां बदलने के लिए भी किया जाता है। बायोटेक्नोलॉजी की बदौलत चिकित्सा के क्षेत्र में कई नई खोजें हुई हैं। इसके अलावा फसलों को बीमारी और कीटाणुरोधी बनाने, ऊर्जा के अतिरिक्त संसाधन जुटाने, पर्यावरण को स्वच्छ रखने की नई तकनीक विकसित करने और ऐसे ही कई उपलब्धियां हासिल करने में मदद मिली है।

बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च के क्षेत्र में इंटेल ने बायोटेक्नोलॉजी शोधकर्ताओं की एक टीम बनाई है जो कि सिलिकॉन चिप का प्रयोग करेगी। उदाहरण के तौर पर स्मार्ट जुराबें आपको इस बात की जानकारी देंगी कि आपके पैरों में छाले हैं और इंटेलीजेंट मिरर आपकी त्वचा को स्कैन कर लेंगे और त्वचा संबंधी रोगों के बारे में पहले ही जानकारी दे देंगे। बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल के कुछ क्षेत्रों में कंप्यूटिंग और सिलिकॉन टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है।

कैसे-कैसे कोर्स
बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक स्तर पर आप बीएससी, बीई और बीटेक कर सकते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर आप एमएससी, एमटेक के विकल्प भी आपके लिए मौजूद हैं। अंडरग्रेजुएट कोर्स में 12वीं के बाद दाखिला लिया जा  सकता है। इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए आपको विज्ञान का अभ्यर्थी होना चाहिए। आईआईटी संस्थानों में पांच साल का इंट्रीगेटेड एमटेक कोर्स उपलब्ध है, जो कि 12वीं के बाद किया जा सकता है।

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