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झूठे दावेदारों के खिलाफ होगी कार्यवाई

मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने वाहन दुर्घटना के मामले में वास्तविक रूप से जरूरतमंद व्यक्ति को मुआवजे से वंचित करने के लिए अदालत को गुमराह करने वाले दावेदारों को आपराधिक मुकदमे का सामना करने को तैयार रहने की हिदायद दी है।


ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी एस. के. शर्मा ने कहा कि मुआवजे की राशि को जरूरतमंद उत्तराधिकारी को देने से बचने के लिए सबूतों के जरिए अदालत को गुमराह करना अपराध के दायरे में आता है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसे दावेदारों के खिलाफ अगर अदालत कड़ी कार्रवाई नहीं करती है तो मुआवजे के लिए अदालत को गुमराह करने वालों को बढ़ावा मिलेगा और वास्तविक हकदार इससे वंचित हो जाएंगे।


जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर अदालत को गुमराह करता है और बूढे माता पिता अथवा पत्नी और बच्चों को मुआवजे से वंचित रखता है तो उसे आपराधिक मुकदमे का सामना करना होगा । ट्रिब्यूनल ने यह व्यवस्था सड़क हादसे में मारे गए एक युवक की पत्नी को मुआवजे से वंचित करने वाले उसके माता पिता और भाई के खिलाफ आपराधिक सुनवाई के दौरान दी । मृतक देवाशीष अस्थाना के परिजनों ने अदालत में कथित रूप से यह कहा था कि वह शादीशुदा नहीं था । ट्रिब्यूनल ने अस्थाना की पत्नी रितु को ब्याज सहित 13 लाख 78 हजार रुपए मुआवजे के तौर पर देने का फैसला किया।

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