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चुपके से बीत गया छह दिसंबर

शंका और आशंका के बीच छह दिसंबर चुपके से निकल गया। अयोध्या कांड की बरसी सपाईयों ने कलंक दिवस के रूप में मनाया मगर प्रशासन की सख्ती देखते हुए किसी ने पार्टी दफ्तर की दहलीज नहीं लांघी। इक्का-दुक्का संगठनों ने शांति से प्रशासन के जरिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे तो हिंदू संगठनों के साथ भाजपाई सुबह से शाम तक चुप्पी साधे रहे।


अयोध्या कांड की तारीख करीब आने से पहले लिब्राहन आयोग का पिटारा खुला था। अफसरों को डर था कि छह दिसंबर को सियासी कड़वाहट कहीं कुछ गड़बड़ न करा दे। इसे देखते हुए शासन ने सभी जिलों में छह दिसंबर को किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। फिर भी प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा था। छह दिसंबर को जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस के साथ मजिस्ट्रेटों को भी जुटाया गया था। रविवार को छह दिसंबर शांति से गुजर गया तो अफसरों ने भी राह तक की सांस ली।


इधर, घोषणा के मुताबिक सपा नेता- कार्यकर्ता दोपहर में आरडीसी स्थिति कार्यालय पर जुटे और मीटिंग की। पार्टी जिलाध्यक्ष औलाद अली, धर्मवीर डबास, रामकिशोर अग्रवाल, जेपी कश्यप, सपा नेता जितेन्द्र यादव, प्रवीन ढाका, राशिद मलिक, उम्मेद, मुबारक आदि ने छह दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को देश के लिए कलंक करार दिया। नवभारत निर्माण पार्टी के प्रभारी मुहम्मद असलम कुरैशी ने कार्यकर्ताओं के साथ कार्यालय पर विरोध दिवस मनाया। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग अध्यक्ष अब्दुल क्यूम ने कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट जाकर प्रशासन को विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।


दूसरी ओर, भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से शाम तक किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली।

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