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भारत, रूस गोर्शकोव को लेकर व्यापक समझौते पर पहुंचे

भारत, रूस गोर्शकोव को लेकर व्यापक समझौते पर पहुंचे

भारत और रूस विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव करार की कीमतों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को तोड़ने के लिए एक व्यापक समझौते पर पहुंच गए हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को कहा कि जिस आम समझौते पर काम किया गया है, उसका उद्देश्य दोनों के बीच आपसी संतोष बनाए रखना है जो भारत के विमानवाहक पोत खरीदने का फैसला करने के बाद समझौते को अंतिम रूप देने में नाकाम रहे हैं। इस पोत को भारतीय नौसेना में आईएनएस विक्रमादित्य के तौर पर शामिल किया जाना है। सूत्रों ने संकेत दिए कि यह करार अब द्विपक्षीय संबंधों में खटास नहीं लाएगा।

बहरहाल, सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में समझौते पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव के साथ कल होने वाली शिखर वार्ता के बाद हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है। सिंह आज से रूस की आधिकारिक यात्रा शुरू कर रहे हैं। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया था कि इस करार से जुड़ी समस्याओं का व्यवहार्य हल निकल आएगा।

नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा ने पिछले सप्ताह कहा था कि एडमिरल गोर्शकोव को लेकर कीमत संबंधी बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन उन्होंने करार पूरा होने की कोई समय सीमा बताने से इनकार कर दिया था। एडमिरल गोर्शकोव को लेकर बातचीत गत तीन वर्ष से जारी है।

वर्मा से जब यह पूछा गया कि क्या यह बातचीत सिंह की रूस यात्रा से पहले पूरी हो जाएगी तो उन्होंने कहा कि मैं समय सीमा को लेकर कोई अटकल लगाने का जोखिम उठाने का इरादा नहीं रखता। हम अंतिम चरण में हैं। गोर्शकोव और अन्य कीमतों के लिए जरूरी कार्य तय करने के लिए ताजा लागत को लेकर चौथे दौर की बातचीत जारी है।

वर्मा ने कहा था कि भारत इस पर काम कर रहा है ताकि 2012 तक उसकी सुपुर्दगी हो सके। हम रूसी लोगों के साथ हर द्विपक्षीय बैठक में इस पर ध्यान देना जारी रखेंगे। भारत ने यह युद्ध पोत 2004 में 97.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर में खरीदा था लेकिन रूस के पोत कारखाने सेवमेश ने 2007 के बाद से दो बार इसकी कीमत में इजाफा कर दिया है। वर्तमान में वह 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त राशि की मांग कर रहा है।

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