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सैर कर दुनिया में गालिब जिंदगानी फिर कहां

"सैर कर दुनिया की ग़ालिब जिन्दगानी फिर कहां!

जिन्दगानी ग़र रही तो, नौजवानी फिर कहां!!"

 

यात्रा का अपना एक समाजिक सरोकार भी है। आप नई जगह से वाकिफ होते हैं, नए लोगों से मिलते हैं और खास बात ये है कि आप किसी यात्रा पर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से दूर होते हैं। यात्रा शरीर और मन को ताजगी देने का एक माध्यम है। यात्रा चाहे धार्मिक हो या मौज मस्ती के लिए की गई हो, समुद्र या फिर रेगिस्तान की, किसी भी तरह की यात्रा का एक अनूठा ही एहसास है। पहले जमाने में जब कोई व्यक्ति यात्रा के लिए जाता था, तो सूचनाओं के अभाव की वजह से रास्तों व जगहों के बारे में ज्यादा जानकारी बटोरना बेहद मुश्किल था। लेकिन आज इंटरनेट के आने के बाद आप कहीं भी घूमना चाहें तो उसकी पूरी जानकारी आपके कंप्यूटर पर घर बैठे उपलब्ध है। यात्रा स्थल और होटल के बारे में सभी सहूलियतें आपको इंटरनेट से मिल जाती हैं। साथ ही विभिन्न वेबसाइट और ब्लॉग्स के जरिए आप अपनी यात्रा का अनुभव दूसरे लोगों से बांट सकते हैं और दूसरों का अनुभव भी आपके काम आ सकता है।

 

क्या आपको अक्सर आपका हनीमून याद आता है जहां आप दोनों ने जिन्दगी के वो हसीन लम्हे बिताए थे। क्या दोस्तों के साथ बाइक पर सवार होकर वो लॉन्ग ड्राइव पर जाने के अनुभव को आप अपनी जिन्दगी का सबसे रोमांचक और फनी ट्रिप मानते हैं? याद कीजिए वो कौन सा झरना या तालाब था जिसके किनारे से उठने का मन ही नहीं कर रहा था। चांदनी रात में किसी पहाड़ी होटल के आंगन में तारे गिनना और वहां की मिट्टी की खुशबू की याद आपको खूब सताती है? जिन्दगी के उन हसीन लम्हों को एक बार फिर जीने की आपकी चाहत है तो उसका सबसे बढ़िया तरीका है उन लम्हों को दुनिया को बताएं और उनसे जुड़ी हुई यादों को सबसे बांटें। तो अब देर किस बात की थोड़ा सा वक्त निकालकर एक बार फिर उन लम्हों को अपनी व्यस्त जिंदगी में फिर से उतारें और दुनिया को अपने अनुभवों से लाभ लेने का मौका दें।

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