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बदलते दौर के हिसाब से ढ़लना होगा

मनुष्य एक समाजिक प्राणी है। यह बात हम सब जानते हैं। और समाज लोगों के आर्थिक तानेबाने से चलता है। इसी सामाजिक-आर्थिक तानेबाने को दुरुस्त रखने और व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए शासन की आवश्यकता होती है, जिसके लिए राजनीति जन्म लेती है। शुरु से ही राजनीति के अनेक रूप रहे हैं। कभी राजशाही थी, तो कभी तानाशाही शासन का भी युग रहा। लेकिन जैसे-जैसे समाज में प्रबुद्धता आई वैसे-वैसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता, न्याय व प्रकृति द्वारा दिए गए कुछ अधिकारों के प्रति लोग सचेत हुए। इसी का नतीजा है कि आज हम लोकतांत्रिक समाज में रह रहे हैं। इसकी भी अपनी सीमा है। इसमें भी कई समस्याएं हैं। राजनीति का अपराधीकरण, पैसे का बढ़ता जोर, भ्रष्टाचार आदि कई समस्याएं गिनवाई जा सकती है। जिससे जूझना और इससे निपटने के लिए रास्ता निकालना जरूरी है।

 

कार्ल मार्क्स ने कहा था, `पैसा समाज का प्रधान संचालक तत्व है'। इस पैसे के खेल में सब लगे हैं। इसने दो बड़ी व्यवस्थाओं को जन्म दिया, पूंजीवाद और समाजवाद। सैद्धांतिक स्तर पर दोनों व्यवस्थाओं के बीच विरोध से हम सब वाकिफ हैं। हम अपने देश भारत की बात करें तो हम भी पूंजीवाद के रथ पर सवार होकर उच्च विकास दर को हासिल कर रहे हैं। मंदी ने इस वृद्धि दर पर थोड़ी ब्रेक जरूर लगा दी है फिर भी हम दुनिया के तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं।

 

देश अमीर हो रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या देश के साथ देश के लोग भी अमीर हो रहे हैं। अभी भी देश में आय के वितरण की असमानता बरकरार है। शहरी और ग्रामीण भारत के बीच जो गरीबी-अमीरी की बढ़ती खाई नजर आ रही है उसको पाटना हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। विकास बनाम वृद्धि दर के  बीच तालमेल कायम करना होगा। अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भी कहा है कि जहां अभी भी बहुत बड़ी जनसंख्या भूखी है, वहां आप उच्च वृद्धि दर को लेकर क्या करेंगे।

 

सामाजिक स्तर पर भी आप पाएंगे कि 21वीं सदी में हम जातिवाद और संप्रदायवाद जैसे चिंतन से जुड़े हुए हैं। सैद्धांतिक स्तर पर तो हम मानते हैं कि यह गलत है, लेकिन व्यवहारिकता की बात आती है, तो ज्यादातर लोग इसी विकास विरोधी चिंतन का हिस्सा बन जाते हैं। इस सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक तानेबाने को सही रूप से चलाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।

 

आज के दौर की इन समस्याओं में आपकी नजर में कौन सी ऐसी समस्याएं है जो आपकी नजर में सबसे गंभीर   है। क्या आपके पास उससे निपटने की कोई रुपरेखा है? अगर हां, तो हमें बताइए।

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