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आर्थिक साझेदारी से ही घटेंगी दूरियां

भारत की मेहमान नवाजी पर आये पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने फिर से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को राजनीतिक विवादों से जोड़ दिया है। उन्होंने उद्योग चैंबर एसोचैम जसे कॉरपोरट मंच का उपयोग भारत पर अपना दबाव बढ़ाने के लिए करते हुये खास राजनयिक अंदाज में कहा कि पाक पूर एशियाई महाद्वीप के लिए आर्थिक खुशहाली के लिए बड़ा रणनीतिक गलियारा साबित हो सकता है। भारत पाक आर्थिक संबंधों में तेजी लाने की जरूरत पर बल देते हुये उन्होंने कश्मीर विवाद का नाम लिये बगैर कहा कि इसके लिए पहले दोनों देशों के बीच सभी विवादों का हल निकालना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पाक की सत्ता संभाली तो भारत से आयात के लिए सिर्फ 200 उत्पादों की ही अनुमति थी जो बढ़कर 1400 हो चुके हैं। द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में तेजी सभी आपसी विवादों के समाधान पर ही निर्भर होगी। दूसरी ओर मुशर्रफ ने कूटनीतिक अंदाज में राजनीतिक मुद्दों के बजाय आर्थिक संबंधों को कहीं अधिक अहमियत देते की वकालत करते हुये कहा कि दोनों देशों को अपने छोटे-मोटे विवादों को हल करते हुये आर्थिक संबंधों को तेज करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिये क्योंकि राजनीतिक मुद्दों के बजाय आर्थिक मामलों को कहीं अधिक अहमियत देने का समय आ गया है। उद्योगपतियों को संबोधित करते हुये मुशर्रफ ने कहा कि पाक पूर एशियाई महाद्वीप में रणनीति लिहाज से ऐसी जगह पर स्थित है जिससे वहां खाड़ी देशों, मध्य पूर्व, केंद्रीय एशिया, चीन और भारत जसे देशों को जोड़ने के लिए ऊरा और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण गलियारा बन सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा शताब्दी भौगोलिक-आर्थिक एकीकरण की है।

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