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मिग-29के की पहली खेप गोवा पहुंची

मिग-29के की पहली खेप गोवा पहुंची

रूस में बने विमानवाही पोत आईएनएस विक्रमादित्य ( रूसी नाम एडमिरल गोर्शकोव) पर तैनात होने वाले 16 मिग-29के विमानों में से पहला बैच यानी तीन विमान शुक्रवार शाम गोवा पहुंच गया है। ये विमान रूस के विशालकाय परिवहन विमान एएन-124 में अलग-अलग हिस्सों में लाए गए। इन हिस्सों को जोड़ने का काम भारत में नौसेना के तकनीशियन करेंगे। 

नौसेना प्रवक्ता कमांडर पी.वी.एस.सतीश ने बताया कि पहले बैच के विमानों के पुर्जे गोवा स्थित नौसेना अड्डा आईएनएस हंसा पहुंच गए हैं। इन हिस्सों को जोड़ कर चार विमान तैयार किए जाएंगे और उम्मीद है कि अगले वर्ष जनवरी में इनकी उड़ानें शुरू हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि इसी माह के अंत तक तीन और विमान आ जाएंगे।

रूस से विमानवाही पोत विक्रमादित्य को खरीदने का सौदा 2004 में किया गया था। तब सौदे की रकम डेढ़ अरब डालर थी लेकिन 2007 में रूस ने इसके लिए एक अरब 20 करोड़ डालर की अतिरिक्त मांग कर दी। रूस के साथ अंतिम कीमत पर मोलभाव जारी है और उम्मीद है कि विक्रमादित्य 2012 तक भारतीय नौसेना को उपलब्ध हो जाएगा। विक्रमादित्य के सौदे में 16 मिग-29के, कामोव-27हेलिक्स-ए और कामोव-31हेलिक्स-बी पनडुब्बीनाशक हेलीकॉप्टरों की कीमत शामिल है।

जब तक विक्रमादित्य भारतीय नौसेना में शामिल नहीं होता तब तक मिग-29के विमानों को जमीन से ऑपरेट किया जाएगा। कोच्चि में बन रहे स्वदेशी विमानवाही पोत पर भी मिग-29 और स्वदेशी तेजस विमान तैनात करने की योजना है लेकिन तेजस के नौसेना संस्करण तैयार होने में हो रही देरी को देखते हुए नौसेना विदेशी विमान भी खरीदने जा रही है। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। स्वदेशी विमानवाही के लिए नौसेना 29 और मिग-29के विमान खरीदने पर विचार कर रही है। इस तरह नौसेना के पास 45 मिग-29के विमान होंगे।
हाल ही में रूस में मिग-29के के अंतिम ट्रायल सफलता के साथ पूरे हुए थे और अब भारत में तैयार होने के बाद होने वाले ट्रायल के दौरान रूसी विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे।

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